धनबाद की पांच पंचायतों को पहले चरण में जीरो ड्रॉपआउट पंचायत बनाने की तैयारी है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के प्रत्येक जिले में पांच-पांच पंचायतों का चयन कर वहां 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का विद्यालय में नामांकन और उनका नियमित ठहराव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। पहले चरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 30 सितंबर की समयसीमा तय की गई है।
योजना के अनुसार चयनित पंचायतों के सभी गांवों और टोलों में इस आयु वर्ग के बच्चों की स्थिति देखी जाएगी। पंचायत के दायरे में आने वाले सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक और प्लस टू विद्यालयों के पोषक क्षेत्रों में चिह्नित प्रत्येक बच्चे का नामांकन जरूरी होगा। लक्ष्य है कि कोई बच्चा स्कूल से बाहर या पढ़ाई छोड़ने वाला न रहे।
परियोजना परिषद के आदेश में लगातार 30 विद्यालय दिवस तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चे को ड्रॉपआउट माना गया है। किसी माह के कुल कार्य दिवसों में 80 से 100 प्रतिशत उपस्थिति वाले विद्यार्थी नियमित और 80 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थी अनियमित माने जाएंगे। अनियमित बच्चों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश है, ताकि वे पढ़ाई से अलग न हों।
जिस विद्यालय के निर्धारित पोषक क्षेत्र के सभी बच्चे नामांकित और नियमित होंगे, उसे जीरो ड्रॉपआउट स्कूल कहा जाएगा। ऐसी घोषणा होने पर स्कूल के प्रवेश द्वार पर जीरो ड्रॉपआउट स्कूल लिखे नीले रंग का झंडा लगाया जाएगा। यह झंडा तभी तक रहेगा, जब तक संबंधित क्षेत्र के सभी बच्चों का नामांकन और नियमित उपस्थिति बनी रहेगी।
प्रमाणन की जिम्मेदारियां भी अलग-अलग स्तर पर निर्धारित की गई हैं। विद्यालय के ड्रॉपआउट-मुक्त होने का प्रमाणपत्र मुखिया के स्तर से और पंचायत का जीरो ड्रॉपआउट प्रमाणपत्र उपायुक्त के स्तर से जारी किया जाएगा। इसके लिए विद्यालय, मुखिया, जिला शिक्षा अधीक्षक और उपायुक्त स्तर पर अलग-अलग गतिविधियां संचालित की जानी हैं।
पहले चरण के बाद योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। दूसरे चरण में प्रत्येक प्रखंड की कम से कम पांच पंचायतों को 30 अक्टूबर तक और तीसरे चरण में प्रत्येक प्रखंड की न्यूनतम दस पंचायतों को 30 नवंबर तक जीरो ड्रॉपआउट घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। धनबाद में प्रारंभिक पांच पंचायतों के लिए तय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उपायुक्त स्तर से घोषणा की जाएगी।