कुड़ू के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में खराब पड़े आरओ सिस्टम, चापानल पर निर्भर बच्चे

लोहरदगा के कुड़ू प्रखंड में कई वाटर प्यूरीफायर तकनीकी खराबियों के कारण बंद पड़े हैं। मरम्मत नहीं होने से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे चापानल का पानी पी रहे हैं।

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कुड़ू में खराब पड़े वाटर प्यूरीफायर सिस्टम से प्रभावित बच्चों की पेयजल व्यवस्था

लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड में विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाए गए कई वाटर प्यूरीफायर सिस्टम उपयोग में नहीं आ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पाइप टूटने, बिजली का तार खराब होने, नल जाम होने और हीटर बंद होने जैसी समस्याओं के कारण ये मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसका सीधा असर बच्चों के लिए उपलब्ध पेयजल सुविधा पर पड़ा है।

आरओ सिस्टम काम नहीं करने के कारण संबंधित विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे चापानल के पानी पर निर्भर हैं। परिसर में मशीन लगी होने के बावजूद उससे शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा। विद्यालयों की प्रधानाचार्यों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और अन्य कर्मियों की ओर से पंचायत के मुखिया को कई बार खराबी की सूचना देने की बात भी सामने आई है।

इन प्रणालियों की खरीद वर्ष 2024 में 15वें वित्त आयोग से पंचायतों को मिली राशि से की गई थी। इन्हें सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पंचायत सचिवालयों में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया था। व्यवस्था में ठंड के दौरान गर्म और गर्मियों में ठंडा पानी देने की सुविधा होने की बात कही गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर मशीन लगाने के कुछ महीने बाद ही खराब हो गई थी, जबकि कई जगह करीब एक वर्ष से इसका इस्तेमाल बंद है। रखरखाव और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण सार्वजनिक राशि से खरीदी गई ये प्रणालियां अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही हैं।

खरीद की लागत को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में आठ लीटर क्षमता वाले ब्रांडेड आरओ और हीटर सिस्टम का बाजार मूल्य करीब 49 हजार से 52 हजार रुपये बताया गया है, जबकि विभिन्न पंचायतों में प्रति इकाई लगभग 1.36 लाख से 1.49 लाख रुपये खर्च किए जाने का आरोप है। जनप्रतिनिधियों के अनुसार खरीद का विरोध हुआ था और जांच भी कराई गई, लेकिन उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।

प्रभारी बीडीओ सह सीओ संतोष उरांव ने बताया कि मशीनें उनके पदस्थापन से पहले लगाई गई थीं और मामला अब उनके संज्ञान में आया है। उनके मुताबिक एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रकरण को देखा जाएगा तथा उपायुक्त को भी इसकी जानकारी दी जाएगी। फिलहाल खराब प्रणालियों की मरम्मत और उन्हें दोबारा चालू करने की जिम्मेदारी पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।