धनबाद के तेलमच्चो की आठ वर्षीय बच्ची को जापानी इंसेफेलाइटिस का संदिग्ध मरीज मानते हुए एसएनएमएमसीएच भेजा गया था, लेकिन परिजन उसे अस्पताल से घर ले गए। मंगलवार सुबह स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची तो बच्ची वहां नहीं मिली। इसके बाद सिविल सर्जन के निर्देश पर एक टीम उसके घर पहुंची और जांच के लिए रक्त का नमूना लिया।
बाघमारा स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने सोमवार को बच्ची को एसएनएमएमसीएच भेजा था। उसके पिता ने आरोप लगाया कि भर्ती कराने के बाद कोई चिकित्सक या कर्मचारी बच्ची को देखने नहीं पहुंचा और अस्पताल में दवा भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बच्ची को अस्पताल में रखना कठिन हो रहा था, इसलिए परिवार उसे घर ले आया। ये बातें परिजन का पक्ष हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर से लिए गए रक्त नमूने की जांच के बाद रिपोर्ट आने की बात कही है। विभाग ने बच्ची की निगरानी के लिए भी टीम भेजी है। उपलब्ध विवरण में बच्ची को अभी संदिग्ध मरीज बताया गया है, इसलिए जांच रिपोर्ट से पहले उसमें जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है।
इसी क्षेत्र के 12 वर्षीय कन्हाई तुरी की हाल में जापानी इंसेफेलाइटिस से मौत होने की जानकारी भी सामने आई है। वह चार दिनों तक एसएनएमएमसीएच में भर्ती था और उसकी जांच रिपोर्ट मौत के एक दिन बाद आई थी। मंगलवार को राज्य सर्विलांस की टीम तेलमच्चो पहुंची तथा उसके परिजनों से जानकारी जुटाई। टीम ने आसपास की सफाई और सुअर तथा मुर्गी पालन वाले स्थानों का भी निरीक्षण किया।
तेलमच्चो में करीब 20 ऐसे बच्चों की पहचान की गई है, जिन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका नहीं लगा है। यह स्थिति जिले में टीकाकरण की पहुंच को लेकर चिंता बढ़ाती है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग जापानी इंसेफेलाइटिस सहित अन्य टीकाकरण लगभग शत-प्रतिशत होने का दावा करता है। क्षेत्र में मिले बिना टीकाकरण वाले बच्चों ने इस दावे के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने चिन्हित बच्चों का टीकाकरण कराने का निर्देश दिया है। एसएनएमएमसीएच को भी स्थिति की निगरानी करने को कहा गया है। अब बच्ची की जांच रिपोर्ट, उसकी स्वास्थ्य निगरानी और तेलमच्चो में छूटे बच्चों का टीकाकरण इस मामले में आगे की प्रमुख कार्रवाई होगी।