रांची में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की राज्य और केंद्र प्रायोजित कृषि योजनाओं की समीक्षा की। कई योजनाओं में वित्तीय लक्ष्य की तुलना में उपलब्धि कम मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई और संबंधित नोडल पदाधिकारियों को क्रियान्वयन तेज करने के निर्देश दिए।
बिरसा बीज उत्पादन, विनिमय एवं वितरण योजना के तहत जिलों को आवंटित राशि का खर्च बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। निदेशक ने इसके लिए जिला कृषि पदाधिकारियों से नियमित संवाद करने को कहा, ताकि आवंटन और वास्तविक प्रगति के बीच अंतर कम किया जा सके।
कृषि मेला, कार्यशाला, प्रदर्शन और प्रशिक्षण से जुड़ी योजना की भी बैठक में समीक्षा हुई। जून में आयोजित कृषि व्यापार मेले और खरीफ कर्मशाला के व्यय भुगतान से संबंधित संचिका तथा आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। फसल सुरक्षा कार्यक्रम में फसल रक्षक की नियुक्ति और खर्च बढ़ाने के लिए सभी उपायुक्तों को भेजे जाने वाले पत्र का प्रारूप तैयार करने को कहा गया।
जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ 18 सितंबर को समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया है। एफपीओ अनुदान योजना के संबंध में विभाग को भेजे गए पत्र पर नियमित रूप से आगे की कार्रवाई करने और झारखंड स्टेट मिलेट मिशन के तहत जिलों को पत्र भेजकर फसल सर्वेक्षण में तेजी लाने को कहा गया।
समेकित बिरसा ग्राम-सह-कृषक पाठशाला योजना पर उप कृषि निदेशक को संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा कर अद्यतन प्रतिवेदन देने की जिम्मेदारी मिली। झारखंड बीज प्रमाणन एजेंसी के आवंटन संबंधी निर्णय के लिए विभाग को पत्र भेजने और निगम में प्रस्तावित नियुक्तियों का प्रस्ताव दो दिनों में प्रस्तुत करने को भी कहा गया।
समिति की योजनाओं में जिलों के खर्च की स्थिति असंतोषजनक पाए जाने पर सभी उपायुक्तों को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। निदेशक ने प्रत्येक सप्ताह जिला कृषि पदाधिकारी या परियोजना निदेशक के साथ समीक्षा करने को कहा। योजनाओं के संचालन के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई की जरूरत होने पर उसके गठन का प्रस्ताव और आरएफपी एक सप्ताह में तैयार करने का निर्देश दिया गया है।