कैरो में करमा पूर्व संध्या समारोह, 30 दलों ने पेश किए पारंपरिक नृत्य

लोहरदगा के कैरो जतरा टांड़ में आयोजित प्रखंड स्तरीय समारोह में पारंपरिक नृत्य-संगीत के साथ करमा पर्व का संदेश साझा किया गया और प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मान मिला।

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कैरो जतरा टांड़ में करमा पूर्व संध्या समारोह के दौरान पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुति

लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड स्थित जतरा टांड़ में शनिवार को करमा पूर्व संध्या सह मिलन समारोह आयोजित किया गया। प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम में अलग-अलग गांवों से आए 30 खोड़ाहा दलों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत प्रस्तुत किया। ढोल-मांदर की धुनों के बीच जुटे ग्रामीणों ने करमा पर्व से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं को सामूहिक रूप से मनाया।

समारोह का उद्घाटन झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा और लोहरदगा के विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव समेत अन्य अतिथियों ने किया। इससे पहले निर्माणाधीन शक्ति खूंटा के पास पाहन, पुजार और महतो ने पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। आयोजन समिति ने अतिथियों का अंगवस्त्र, बैच और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।

कार्यक्रम में मंत्री चमरा लिंडा ने करमा पर्व को भाई-बहन के संबंध, प्रकृति से जुड़ाव और अच्छी फसल की कामना का प्रतीक बताया। उन्होंने समुदाय से अपनी परंपराओं को जीवित रखने, शिक्षा को आगे बढ़ाने और नशापान से दूर रहने का आह्वान किया। उनका जोर था कि बदलते समय में भी पर्व अपनी पारंपरिक पहचान के साथ मनाया जाए।

विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने आदिवासी कला, संस्कृति और रीति-रिवाजों के संरक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने हनारा संकल्प अखड़ा का निर्माण कराने तथा पर्व-त्योहारों के अवसर पर ढोल-मांदर सहित पारंपरिक वाद्ययंत्र उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया। अन्य वक्ताओं ने भी करमा-धरमा की कथा, पर्व के इतिहास और आदिवासी सभ्यता के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बातें रखीं।

समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शिक्षा और खेल में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित भी किया गया। मैट्रिक, इंटर और अन्य परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों तथा खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों के बीच पुरस्कार वितरित किए गए। इस सम्मान कार्यक्रम ने आयोजन में नई पीढ़ी की उपलब्धियों को भी प्रमुख स्थान दिया।

कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उरांव, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रीना भगत, आयोजन समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सामूहिक पूजा, पारंपरिक नृत्य, वाद्य संगीत और बच्चों के सम्मान के साथ आयोजित समारोह कैरो क्षेत्र की सांस्कृतिक भागीदारी का मंच बना।