बिरनी के कपिलो में पहली बार करमा पूजा महोत्सव, पारंपरिक गीत-नृत्य में दिखी झारखंडी संस्कृति

गिरिडीह के बिरनी प्रखंड स्थित कपिलो पंचायत में पहली बार करमा पूजा महोत्सव आयोजित हुआ। करम डाली की पूजा के साथ पारंपरिक गीत, मांदर और नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं।

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बिरनी के कपिलो में आयोजित करमा पूजा महोत्सव का सांस्कृतिक कार्यक्रम

गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड की कपिलो पंचायत में शनिवार को पहली बार करमा पूजा महोत्सव आयोजित किया गया। रूपायडीह चानो स्थित बाल विकास उच्च विद्यालय के पीछे खेल मैदान में हुए कार्यक्रम में बिरनी के अलावा बगोदर, राजधनवार और कोडरमा क्षेत्र से भी समाज के लोग पहुंचे। गर्मी के बावजूद दिनभर आयोजन स्थल पर लोगों की मौजूदगी रही।

घटवार-घटवाल आदिवासी महासभा की बिरनी इकाई के तत्वावधान में हुए महोत्सव की शुरुआत राष्ट्रगान से की गई। इसके बाद आयोजकों ने परंपरागत विधि से करम डाली की पूजा-अर्चना की। आयोजन में प्रकृति, कृषि और कर्म देवता के प्रति आस्था को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

पूजा के बाद अतिथियों और अन्य आगंतुकों का स्वागत आम के पत्तों से तैयार माला और टोपी पहनाकर किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं युवतियों और महिलाओं ने मांदर की थाप पर करमा गीतों के साथ सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से स्थानीय परंपराओं की झलक दिखाई गई।

हजारीबाग से आईं खोरठा गायिका मनिता श्री ने कार्यक्रम में कई खोरठा करमा गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति के दौरान उपस्थित लोग भी उत्सव में शामिल हुए। पहली बार इस स्तर पर महोत्सव आयोजित होने के कारण स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखा गया।

आयोजक और पूर्व प्रमुख सीताराम सिंह ने करमा को प्रकृति, कृषि तथा कर्म देवता की आराधना से जुड़ा पर्व बताया। उनके अनुसार यह परंपरा भाई-बहन के स्नेह, परिवार की सुख-शांति और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी है। कार्यक्रम में महासभा के प्रदेश अध्यक्ष काशीनाथ सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य अतिथि उपस्थित रहे।

महोत्सव के संचालन और व्यवस्थाओं में बिरनी प्रखंड महासभा के पदाधिकारियों तथा सदस्यों ने भूमिका निभाई। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। विभिन्न क्षेत्रों से लोगों की भागीदारी ने कपिलो में हुए इस पहले करमा पूजा महोत्सव को स्थानीय परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का मंच बनाया।