कोडरमा के ताराटांड़ में दुर्गोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति इस बार शिवलिंग के स्वरूप पर आधारित पंडाल बनवा रही है। समिति के अनुसार, पंडाल की ऊंचाई 45 फीट और चौड़ाई 35 फीट होगी। इसके भीतर मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
ताराटांड़ में वर्ष 1979 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। समिति इस पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंडाल निर्माण, प्रतिमा, विद्युत सज्जा, पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं के लिए भोग-प्रसाद की व्यवस्था कर रही है। पूरे आयोजन पर करीब आठ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
समिति की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, शिवलिंगनुमा पंडाल के निर्माण पर लगभग दो लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पूजा स्थल को आकर्षक बनाने के लिए विद्युत सज्जा भी की जा रही है, जिस पर करीब 80 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। पंडाल और रोशनी की सजावट को इस वर्ष के आयोजन का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है।
मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थानीय कारीगर बद्री पंडित तैयार कर रहे हैं। समिति ने प्रतिमा निर्माण पर करीब 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान बताया है। आयोजकों के अनुसार, प्रतिमा तैयार करते समय कलात्मक स्वरूप के साथ धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखा जा रहा है।
दुर्गोत्सव के दौरान सप्तमी से प्रतिमा विसर्जन तक अलग-अलग प्रकार का भोग अर्पित करने की योजना है। नवमी के दिन खिचड़ी महाभोग की व्यवस्था की जाएगी। समिति ने बंगाल से धाक बजाने वाले कलाकारों को बुलाने की भी तैयारी की है, जिससे पूजा परिसर में पारंपरिक उत्सव का वातावरण बनाया जा सके।
आयोजन समिति का कहना है कि पूजा को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने और श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। समिति इस आयोजन को धार्मिक परंपरा के साथ स्थानीय लोगों को जोड़ने वाले अवसर के रूप में भी देख रही है।