कोयला कर्मियों के पीएफ निवेश में 727.67 करोड़ के नुकसान की सीबीआई जांच का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने डीएचएफएल में सीएमपीएफओ के निवेश से जुड़े 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान की सीबीआई जांच कराने का निर्देश दिया है।

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कोयला कर्मियों के भविष्य निधि निवेश मामले पर झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

धनबाद से जुड़े कोयला कर्मियों के भविष्य निधि निवेश में 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो करेगा। प्रकाशित विवरण के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को कोल एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन, धनबाद की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई जांच का निर्देश दिया।

मामला कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड में किए गए करीब 1,300 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित है। डीएचएफएल के वित्तीय संकट में आने के बाद निवेश की बड़ी राशि फंस गई और सीएमपीएफओ को लगभग 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीएचएफएल की वित्तीय स्थिति को लेकर पहले ही चिंता जताई गई थी। फंड मैनेजरों द्वारा जून 2019 में स्थिति पर सवाल उठाने और निवेश वापस निकालने की सलाह दिए जाने का भी दावा किया गया है। इसके बावजूद समय रहते रकम नहीं निकालने और बाद में नुकसान होने के आरोपों की अब जांच की जाएगी।

हाईकोर्ट ने 10 सितंबर की सुनवाई में नुकसान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने पक्षों से पूछा था कि क्या मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई प्रस्ताव है। विभागीय जांच पूरी होने से पहले एक अधिकारी के संबंध में लगभग दोषमुक्त करने जैसा रुख अपनाने पर भी सवाल किया गया था।

प्रकाशित विवरण के मुताबिक, सीबीआई ने 28 सितंबर को अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा था कि हाईकोर्ट से आदेश मिलने पर एजेंसी जांच कर सकती है। आठ अक्टूबर के निर्देश के बाद निवेश प्रक्रिया, अधिकारियों को मिली चेतावनियों और रकम वापस निकालने में हुई कथित देरी की जांच का रास्ता खुल गया है।

जांच में यह देखा जाना है कि निवेश का फैसला किस स्तर पर और किन प्रक्रियाओं के तहत लिया गया, डीएचएफएल की स्थिति की जानकारी कब मिली तथा चेतावनी के बाद क्या कार्रवाई की गई। नुकसान के लिए जिम्मेदारी और रकम की वसूली के लिए उठाए गए कदम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इन बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।