कोयला चोरी और अवैध खनन रोकने के लिए बनेगी व्यापक एसओपी, धनबाद पर विशेष ध्यान

झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर तैयार हो रही एसओपी में विभागों की जिम्मेदारी, समन्वित कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण की रूपरेखा तय की जाएगी।

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धनबाद के कोयला क्षेत्र में अवैध खनन और कोयला चोरी पर नियंत्रण की प्रतीकात्मक तस्वीर

झारखंड में कोयला चोरी और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की जा रही है। हाईकोर्ट के निर्देश पर बन रहे इस प्रारूप में अवैध उत्खनन के विरुद्ध कार्रवाई के साथ पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी शामिल किए जाने हैं। धनबाद समेत राज्य के कोयला क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहेगा।

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रस्तावित एसओपी को व्यापक और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। अंतिम रूप दिए जाने के बाद मसौदा अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया के पास भेजा जाएगा। इसे पांच नवंबर को अगली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी है।

प्रस्तावित व्यवस्था में कोयला चोरी के स्रोतों की पहचान से लेकर अवैध खनन के मामलों में त्वरित कार्रवाई तक की रूपरेखा तय की जानी है। इसके साथ ही संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और खनन गतिविधियों से प्रभावित इलाकों में पर्यावरणीय क्षति कम करने के उपाय जोड़ने पर भी काम हो रहा है।

मसौदा भारत सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव तथा झारखंड के महाधिवक्ता रोहिताश्य राय की देखरेख में तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस, जिला प्रशासन, कोयला कंपनियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और दूसरे संबंधित विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की व्यवस्था भी एसओपी में स्पष्ट की जाएगी।

सुनवाई में धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन और नगर आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए। बीसीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार अग्रवाल, सीआईएसएफ के महानिरीक्षक और विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस दौरान कोयला चोरी, अवैध खनन और पर्यावरण से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई।

यह विषय ग्रामीण एकता मंच की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने आया था। अदालत ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित पक्षों को शामिल कर ठोस एसओपी बनाने को कहा था। नई प्रक्रिया का उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों की भूमिका और कार्रवाई का तरीका एक साझा ढांचे में निर्धारित करना है।