धनबाद से जुड़े कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) के निवेश मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने का निर्देश दिया है। मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश के बाद दर्ज 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान से संबंधित है। अदालत ने कोल एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, सीएमपीएफओ ने डीएचएफएल में करीब 1,300 करोड़ रुपये लगाए थे। कोयला मंत्रालय से संबंधित लेखा रिकॉर्ड में निवेश की कुल राशि 1,390.25 करोड़ रुपये दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। डीएचएफएल के खिलाफ नवंबर 2019 में दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई और जून 2021 में समाधान योजना को मंजूरी मिली।
सितंबर 2021 में सीएमपीएफओ को 662.58 करोड़ रुपये वापस मिले। इसके बाद निवेश में लगभग 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने 10 सितंबर के अपने आदेश में भी इस नुकसान को गंभीर विषय माना था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे।
याचिका में कहा गया है कि निवेश प्रबंधकों ने 24 जून 2019 को डीएचएफएल की वित्तीय स्थिति से जुड़े खतरे का संकेत देते हुए रकम निकालने की सलाह दी थी। इसके बावजूद पूरी राशि समय पर नहीं निकाली जा सकी। दिसंबर 2019 की बैठक में फंसी रकम वापस लेने के उपायों पर प्रस्ताव आया था, जबकि नवंबर 2021 की निवेश उपसमिति की बैठक में नुकसान को बट्टे खाते में डालने का प्रस्ताव सामने आया।
सीबीआई जांच में निवेश के निर्णय के साथ यह भी देखा जाएगा कि कंपनी की वित्तीय स्थिति की जानकारी मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए। अधिकारियों और न्यासियों की भूमिका, नुकसान के बाद वसूली के प्रयास तथा रकम को बट्टे खाते में डालने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में रहेगी। मामले से जुड़ी फाइल कथित रूप से 16 बार लौटाए जाने के कारणों की भी पड़ताल हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इससे पहले विभागीय जांच पूरी होने से पूर्व तत्कालीन सीएमपीएफओ आयुक्त को लगभग क्लीन चिट मिलने जैसी स्थिति और आपराधिक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल किए थे। अब जांच से निवेश, नुकसान और जिम्मेदारी तय करने से जुड़े घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल होने की अपेक्षा है।