खरसावां-कुचाई के गांवों में पारंपरिक रीति से हुई मां मनसा की पूजा

सरायकेला-खरसावां के खरसावां और कुचाई प्रखंडों में श्रद्धालुओं ने उपवास, मंगल पाठ और विशेष रात्रि पूजा के साथ मां मनसा की आराधना की।

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सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां और कुचाई प्रखंड के विभिन्न गांवों में शुक्रवार को मां मनसा की पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की गई। सुबह से पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कई स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित की गईं और लोगों ने विधि-विधान से आराधना की।

पूजा में शामिल श्रद्धालुओं ने उपवास रखा और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। आराधना के दौरान फल, फूल, घटरा और पेड़ा समेत अलग-अलग पूजन सामग्री अर्पित की गई। कई आयोजन स्थलों पर मां मंगल पाठ भी हुआ, जिससे दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।

रात में विशेष अनुष्ठान किए गए और आधी रात को निसी पूजा संपन्न हुई। स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ जगहों पर रात्रि के समय बलि की रस्म भी निभाई गई। गांवों में पूजा को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

मनसा पूजा से जुड़ा आयोजन मुख्य रूप से तीन दिनों तक चलता है। पहले दिन श्रद्धालु नहाय-खाय की परंपरा के साथ संयम का पालन करते हैं। दूसरे दिन उपवास रखकर रात में विशेष पूजा की जाती है। इसके बाद निर्धारित स्थानीय परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए जाते हैं।

स्थानीय मान्यता में मां मनसा को विषैले जीव-जंतुओं के दंश से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। क्षेत्र में श्रावण, भादो और आश्विन महीने की संक्रांति, जिसे स्थानीय रूप से मासात कहा जाता है, के अवसर पर इस पूजा के आयोजन की परंपरा है।

खरसावां प्रखंड के देहरूडीह, मौलाडीह, कुम्हारसाई, आनंदडीह, उरांवसाही, खेजुरदा, रिडिंग, शिमला, मांगुडीह, बरजुडीह, पदमपुर, पुडिदा, गागुडीह, अरूवां, जिलिंगदा, रामपुर, आमदा, बुरूडीह और बड़ाबाम्बों सहित खरसावां-कुचाई के अनेक स्थानों पर पूजा आयोजित की गई। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आराधना कर आशीर्वाद मांगा।