चाईबासा में आदिवासी उरांव समाज के प्रमुख त्योहार करमा पर्व की तैयारियां जावा जागरण के साथ शुरू हो गई हैं। शहर के सातों अखाड़ों में शुक्रवार रात रतजग्गा किया गया। इस पारंपरिक आयोजन में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों और समाज के अन्य लोगों ने भाग लिया।
शनिवार को सूर्योदय से पहले उपवास रखने वाली कुंवारी कन्याएं रोरो नदी के पास स्थित श्मशान काली मंदिर पहुंचीं। वहां से वे टोकरियों में बालू लेकर मांदर और नगाड़ों की थाप के बीच नाचते-गाते पाहन पुजारी के घर गईं।
पाहन पुजारी के घर बालू में जावा मिलाकर परंपरागत विधि से उसे तैयार किया गया। अब अगले पांच दिनों तक सुबह और शाम जावा के पास पारंपरिक गीत और नृत्य होंगे। इस अवधि में जावा की नियमित देखभाल भी की जाएगी।
उरांव समाज में जावा जागरण करमा पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा है। इसके माध्यम से प्रकृति, हरियाली, अच्छी फसल तथा परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की जाती है। आयोजन के दौरान मांदर और नगाड़ों की थाप तथा सामूहिक नृत्य से क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहा।
जावा जागरण के पांच दिन बाद 22 सितंबर को भादो एकादशी के अवसर पर करमा पूजा आयोजित की जाएगी। पूजा में करम डाल की पारंपरिक रीति-रिवाज से आराधना होगी और गीत-नृत्य के कार्यक्रम होंगे। अगले दिन, 23 सितंबर को करम डाल का विसर्जन निर्धारित है।
कार्यक्रम में बान टोला के मुखिया लालू कुजूर, पाहन पुजारी फागू खलखो सहित समाज के कई लोग उपस्थित रहे। आयोजन में युवाओं की भागीदारी भी रही, जिससे सातों अखाड़ों में करमा पर्व से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियां एक साथ आगे बढ़ीं।