खरसावां के शहरबेड़ा में कार्तिक उरांव जयंती पर मेधावी विद्यार्थी सम्मानित

शहरबेड़ा में कार्तिक उरांव की 102वीं जयंती पर क्विज और खेलकूद कार्यक्रम हुआ। विभिन्न वर्गों के सफल विद्यार्थियों को सम्मानित कर शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और नशामुक्ति का संदेश दिया गया।

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सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड स्थित शहरबेड़ा में गुरुवार को बाबा कार्तिक उरांव की 102वीं जयंती मनाई गई। बाबा कार्तिक उरांव पुस्तकालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए क्विज और खेलकूद गतिविधियां रखी गईं। सफल प्रतिभागियों को सम्मानित करने के साथ बच्चों को नियमित पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया गया।

कक्षा छह-सात के क्विज वर्ग में प्रणिति महतो ने पहला, पायल महतो ने दूसरा और सलमी उरांव ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कक्षा आठ-नौ वर्ग में सीमा महतो प्रथम, मंजू तांती द्वितीय और क्रिस्टी महतो तृतीय रहीं। आयोजकों ने विद्यार्थियों की भागीदारी और प्रदर्शन की सराहना की।

कक्षा 10-12 वर्ग में शिल्पा उरांव ने प्रथम स्थान हासिल किया। गणेश महतो दूसरे और रितिका उरांव तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगी परीक्षा पर आधारित क्विज में शिवानी उरांव प्रथम, जगन्नाथ उरांव द्वितीय और विश्वनाथ प्रधान तृतीय रहे। सभी सफल प्रतिभागियों को आगे भी मेहनत और लगन से अध्ययन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व और युवाओं के भविष्य पर भी चर्चा हुई। उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों से लक्ष्य तय कर नियमित अध्ययन करने तथा अपनी ऊर्जा रचनात्मक गतिविधियों में लगाने की अपील की। युवाओं को नशे से दूर रहकर परिवार और समाज के विकास में योगदान देने का संदेश भी दिया गया।

पुस्तकालय के संचालक डेविड उरांव ने बताया कि क्षेत्र के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ रही है। उनके अनुसार, पुस्तकालय विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। क्षेत्र के कुछ युवाओं का सरकारी सेवाओं में चयन होना इस प्रयास के लिए उत्साह बढ़ाने वाला संकेत माना गया।

आयोजन में वेजवुड एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष अधिवक्ता मोहम्मद मुख्तार अहमद और अधिवक्ता पूजा कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उरांव समाज, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों से जुड़े लोगों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर देना रहा।