पश्चिम सिंहभूम के 305 स्कूलों में ‘पलाश’ की समीक्षा, कमजोर प्रखंडों में निगरानी बढ़ाने पर जोर

‘पलाश’ कार्यक्रम की समीक्षा में अक्टूबर तक विद्यालय भ्रमण का कवरेज 55 प्रतिशत दर्ज हुआ। झींकपानी का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि नोवामुंडी और मंझारी में भ्रमण की गति बढ़ाने की जरूरत बताई गई।

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पश्चिम सिंहभूम जिले के 305 विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए चल रहे ‘पलाश’ कार्यक्रम की गतिविधियों की समीक्षा की गई। समीक्षा में विद्यालय भ्रमण, कक्षा अवलोकन, विद्यार्थियों की भागीदारी और शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग की स्थिति पर ध्यान दिया गया।

जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच विद्यालय भ्रमण का औसत कवरेज 52 प्रतिशत रहा। अक्टूबर में यह बढ़कर 55 प्रतिशत हो गया। झींकपानी प्रखंड ने लगातार चार महीनों तक सभी लक्षित विद्यालयों के भ्रमण का लक्ष्य पूरा किया, जबकि बंदगांव ने अक्टूबर में शत-प्रतिशत कवरेज दर्ज किया।

दूसरी ओर, नोवामुंडी में औसत कवरेज केवल 9 प्रतिशत और मंझारी में 29 प्रतिशत रहा। अक्टूबर तक जिले के 17 प्रतिशत विद्यालयों का भ्रमण लंबित था। नोवामुंडी में सबसे अधिक 77 प्रतिशत स्कूलों का भ्रमण बाकी पाया गया। हाटगम्हरिया में 24 प्रतिशत, मंझारी में 22 प्रतिशत, मझगांव में 20 प्रतिशत और चक्रधरपुर में 19 प्रतिशत विद्यालय लंबित थे। इन क्षेत्रों में भ्रमण की रफ्तार और नियमित निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई गई।

अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच हुए कक्षा अवलोकनों के अनुसार, 65 प्रतिशत कक्षाओं में शिक्षकों ने ऐसे प्रश्न पूछे जिनका उत्तर विस्तार से दिया जा सकता था। हालांकि, 46 प्रतिशत मामलों में ही विद्यार्थियों ने उन प्रश्नों के उत्तर दिए। समीक्षा में इसे बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया।

साक्षरता कक्षाओं में मार्गदर्शित पठन के दौरान बच्चों की पढ़ने संबंधी गलतियों को सुधारने का अभ्यास अक्टूबर-नवंबर के 68 प्रतिशत, दिसंबर-जनवरी के 80 प्रतिशत और फरवरी-मार्च के 71 प्रतिशत अवलोकनों में दर्ज किया गया। इससे अलग-अलग अवधियों में इस शिक्षण प्रक्रिया के इस्तेमाल की स्थिति सामने आई।

गणित की कक्षाओं के 77 प्रतिशत अवलोकनों में शिक्षकों ने शिक्षण-अधिगम सामग्री का उपयोग किया, लेकिन विद्यार्थियों द्वारा ऐसी सामग्री का इस्तेमाल 47 प्रतिशत मामलों में देखा गया। समीक्षा में सभी निर्धारित विद्यालयों का भ्रमण पूरा करने के साथ कक्षा में सामग्री आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया।