खरसावां में 73 रेशम किसानों ने सीखी वैज्ञानिक तसर उत्पादन की तकनीक

‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ कार्यक्रम में किसानों को कीटपालन, रोग नियंत्रण, बीज उत्पादन और कोकून विपणन का प्रशिक्षण दिया गया।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां में 73 रेशम किसानों को वैज्ञानिक तरीके से तसर कीट पालन और उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया। ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान के तहत आयोजित जागरूकता एवं किसान संवाद कार्यक्रम में आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर रहा।

कार्यक्रम का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में विकसित वैज्ञानिक विधियों की जानकारी सीधे उत्पादकों को देना था। किसानों को बताया गया कि इन तकनीकों के उपयोग से तसर कोकून की उत्पादकता और गुणवत्ता बेहतर करने के साथ उनकी आजीविका को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने तसर कीटपालन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, स्वच्छता और रोग नियंत्रण के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी। किसान स्तर पर ग्रेनेज यानी बीज उत्पादन के प्रबंधन तथा कीटपालन वाले क्षेत्र में नियमित सफाई और कीटाणु शोधन के महत्व को भी समझाया गया।

प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा पेब्रिन रोग की पहचान से जुड़ा व्यावहारिक अभ्यास रहा। किसानों को माइक्रोस्कोप की सहायता से इस रोग की पहचान करने की विधि दिखाई गई। इसके साथ ही रोग का समय रहते पता लगाने और रोगमुक्त बीज इस्तेमाल करने की आवश्यकता बताई गई।

कार्यक्रम में कोकून के विपणन, मूल्य निर्धारण और किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने राज्य सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और रेशम किसानों के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता के बारे में बताया।

किसान संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं और सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। अधिकारियों ने उनके समाधान पर जानकारी देते हुए वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में कीटपालन के दौरान धूप और बारिश से बचाव के लिए किसानों के बीच छतरियां भी बांटी गईं।