खूंटी की तीन पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों के परिवारों की समस्याओं पर डालसा ने शुरू की पहल

खूंटी में डालसा की टीम ने अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकीं रौशनी आइंद, बिनिमा धान और नीलम टोपनो के घर जाकर परिवारों की बुनियादी समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों से समन्वय का भरोसा दिया।

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खूंटी की तीन पदक विजेता महिला हॉकी खिलाड़ियों के परिवारों से मिलती डालसा टीम

खूंटी जिले की तीन पदक विजेता महिला हॉकी खिलाड़ियों के परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की टीम ने रौशनी आइंद, बिनिमा धान और नीलम टोपनो के गांवों में पहुंचकर उनके परिजनों से बातचीत की। टीम ने समस्याओं से संबंधित आवेदन भी लिए और विभागीय स्तर पर समाधान की पहल करने का भरोसा दिया।

रौशनी आइंद तोरपा प्रखंड के उयूर गांव की रहने वाली हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वह चीन के मोकी में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। कर्रा प्रखंड के जरियागढ़ स्थित बाभन टोली की बिनिमा धान भी इसी स्वर्ण पदक विजेता टीम में शामिल थीं।

तोरपा प्रखंड के सोंदारी गांव की नीलम टोपनो ने जापान में 29 मई से 6 जून तक आयोजित अंडर-18 एशिया कप में भारतीय टीम के साथ कांस्य पदक जीता था। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद इन खिलाड़ियों के परिवारों ने दैनिक जीवन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी कई परेशानियां डालसा के सामने रखीं।

परिवारों की ओर से वृद्धावस्था पेंशन, जाति प्रमाण-पत्र, बिजली कनेक्शन, शौचालय, आवास, पेयजल और पीसीसी सड़क से संबंधित जरूरतें बताई गईं। डालसा की टीम ने घरों पर जाकर सामाजिक-आर्थिक स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान सामने आए आवेदनों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर कार्रवाई के लिए समन्वय करने की बात कही गई।

यह पहल सरकारी योजनाओं की वास्तविक पहुंच को परिवारों की स्थिति के आधार पर समझने से भी जुड़ी है। खिलाड़ियों के परिजनों से सीधे संवाद के जरिए यह जानने का प्रयास किया गया कि पात्रता और आवेदन प्रक्रिया के बाद भी किन सुविधाओं का लाभ अभी तक नहीं मिल सका है। हालांकि उपलब्ध विवरण में किसी सुविधा के स्वीकृत होने या काम शुरू होने की जानकारी नहीं दी गई है।

डालसा ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने से जोड़ने की भी बात कही है। इसके तहत बाल अधिकार, महिला अधिकार, नि:शुल्क कानूनी सहायता, न्याय तक पहुंच और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल परिवारों की ओर से बताई गई समस्याओं पर संबंधित विभागों की कार्रवाई का इंतजार है।