खूंटी पुलिस ने दिल्ली और जयपुर से चार युवतियों को सुरक्षित निकाला, मानव तस्करी नेटवर्क की जांच जारी

खूंटी पुलिस की विशेष टीम ने दिल्ली और जयपुर में अभियान चलाकर चार युवतियों को सुरक्षित निकाला है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और पुराने मामलों की कड़ियां तलाश रही है।

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खूंटी पुलिस के दिल्ली और जयपुर में चलाए गए बचाव अभियान से संबंधित सांकेतिक दृश्य

खूंटी जिले में मानव तस्करी के मामलों की जांच कर रही पुलिस की विशेष टीम ने दिल्ली और जयपुर में कार्रवाई कर चार युवतियों को सुरक्षित निकाला है। पुलिस के अनुसार, इनमें कई लंबे समय से लापता थीं और उन्हें दूसरे राज्यों में घरेलू काम के नाम पर रखा गया था। अभियान महिला थाना प्रभारी और हातू थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने चलाया।

बरामद युवतियों में कर्रा प्रखंड क्षेत्र की एक युवती भी शामिल है। पुलिस जांच में सामने आया कि उसे नौ वर्ष की उम्र में कथित रूप से बेचकर दूसरे राज्य भेज दिया गया था। अब उसकी उम्र 19 वर्ष है। पुलिस के मुताबिक, नया आधार कार्ड बनवाने के दौरान सत्यापन प्रक्रिया में उपलब्ध जानकारी का उसके पैतृक गांव और पुराने मोबाइल नंबर से मिलान हुआ।

इस सुराग के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी के माध्यम से युवती का स्थान पता किया और उसे खोज निकाला। आरोप है कि तस्करी के बाद उसकी शादी भी करा दी गई थी। पुलिस का कहना है कि इस मामले में संलिप्त तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

खूंटी के पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग के अनुसार, पिछले वर्ष दर्ज प्राथमिकी के आधार पर करीब 11 वर्षों से लापता एक अन्य युवती को भी बरामद किया गया। वहीं, एक सप्ताह पहले मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एक साल से लापता दो बच्चियों को सुरक्षित निकाला गया। खुफिया सूचना के आधार पर घरेलू काम में फंसी एक और युवती तक भी पुलिस पहुंची।

पुलिस के मुताबिक, मानव तस्करी की शिकार युवतियों से महानगरों में घरेलू काम कराया जा रहा था और कुछ मामलों में उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी थी। अब जांच टीम इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के साथ पुराने मामलों के बीच संभावित संबंध तलाश रही है।

पुलिस अधीक्षक ने अभिभावकों से कहा है कि किसी बच्चे या बच्ची के लापता होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। उनके अनुसार, शिकायत में देरी होने से संदिग्धों को साक्ष्य मिटाने या पीड़ित को दूसरी जगह ले जाने का अवसर मिल सकता है, जिससे बरामदगी और जांच कठिन हो जाती है।