खूंटी जिले के गांवों और कस्बों में करम पर्व को लेकर उत्साह है। पर्व की पूर्व संध्या पर सोमवार को विभिन्न सरना स्थलों और करम अखाड़ों में श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गई। मंगलवार को होने वाले मुख्य आयोजन के लिए स्थानीय समितियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
जोजोटोली के बाजारटांड़ में करम पर्व पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार, करम अखाड़ा में दोपहर दो बजे पूजा-अर्चना शुरू होगी। इसके बाद तीन बजे से प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम रखे गए हैं। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।
सरना धर्म सोतो समिति केंद्र, डौगड़ा में धर्मगुरु सोमा कंडीर और भैयाराम ओड़ेया की अगुवाई में विशेष पूजा हुई। सरना स्थल पर भगवान सिंगबोंगा की आराधना कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की गई। इस दौरान करम पर्व की परंपराओं और उसके सामाजिक महत्व पर भी चर्चा हुई।
पर्व के लिए नौ प्रकार के बीजों से जावा तैयार किया गया है। इनमें धान, मड़ुआ, उड़द, सरगुजा, ज्वार, गोंदली, मक्का, गेहूं और रहड़ के बीज शामिल हैं। नदी से छानी गई बालू को नई टोकरियों में भरकर बीज बोए गए और नौ दिनों तक हल्दी मिले पानी से उन्हें सींचा गया। तैयार जावा को सरना स्थलों और अखाड़ों में अर्पित किया गया।
डौगड़ा के साथ लुम्बई, दुलवा, उलिहातु, सोंगरा, बालो, जोजोटोली, बुदुडीह और अन्य स्थानों पर भी सामूहिक आयोजनों की तैयारी की गई है। पर्व के दौरान पुरुष जावा फूल कान में और महिलाएं केशों में लगाकर उत्सव की खुशियां साझा करेंगी।
करम पर्व में जावा को सौहार्द, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक अगुवाओं ने पर्व को अपने कर्मों पर विचार करने तथा समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाने का अवसर बताया। सामूहिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय परंपराओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।