सिमडेगा के पलाश दिवाली मेले में स्थानीय हुनर और ग्रामीण उत्पाद बने आकर्षण

हेरिटेज भवन परिसर में आयोजित मेले में मिट्टी और बांस से बने सामान के साथ वस्त्र, आभूषण तथा वन उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ग्रामीण महिला उत्पादकों और स्वयं सहायता समूहों को बिक्री का मंच भी मिला है।

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सिमडेगा के हेरिटेज भवन परिसर में आयोजित पलाश दिवाली मेला स्थानीय शिल्प, ग्रामीण उत्पादों और झारखंडी संस्कृति का साझा मंच बन गया है। उपायुक्त कंचन सिंह की पहल पर आयोजित मेले के दूसरे दिन गुरुवार को भी लोगों की भीड़ रही। परिसर को देसी सजावट के साथ तैयार किया गया है, जहां स्थानीय संसाधनों से बनी वस्तुएं प्रमुख आकर्षण हैं।

मेले में मिट्टी, बांस और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से तैयार कई तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। बांस की कलाकृतियों के अलावा सूप, टोकरी और पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। धान की सुनहरी बालियों से तैयार झाड़ू के आकार की सजावटी वस्तुएं भी यहां अलग पहचान बना रही हैं।

दीपावली को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के रंग-बिरंगे दीये और कलात्मक मूर्तियां भी बिक्री के लिए रखी गई हैं। इनके साथ मिठाइयां, वस्त्र, आभूषण, वन उत्पाद तथा अन्य हस्तनिर्मित सामान उपलब्ध हैं। इन वस्तुओं में स्थानीय हुनर और ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है।

मेले में स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उत्पादकों को अपने सामान के प्रदर्शन तथा बिक्री का अवसर दिया गया है। इससे वे सीधे खरीदारों तक अपने उत्पाद पहुंचा पा रही हैं। आयोजन स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं के लिए बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिला उत्पादकों की आर्थिक आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा है।

खरीदारी के अलावा मेले में सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। शाम के समय लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य और मांदर की थाप से परिसर जीवंत हो उठा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से आगंतुकों को झारखंड की सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला।

गुरुवार की शाम परिसर में फिल्म ‘चक दे इंडिया’ का प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के साथ प्रशिक्षु हॉकी खिलाड़ी भी पहुंचे। स्थानीय उत्पादों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और फिल्म प्रदर्शन के कारण मेला परिवारों तथा बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।