खूंटी में दुर्गोत्सव की तैयारी तेज, पर्यावरण अनुकूल पंडालों पर जोर

खूंटी शहर और जिले के प्रखंडों में दुर्गा पूजा पंडालों का निर्माण शुरू हो गया है। कई समितियां पर्यावरण अनुकूल सामग्री, थीम आधारित सजावट और विशेष रोशनी का उपयोग कर रही हैं।

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खूंटी जिले में शारदीय नवरात्र और दुर्गोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में करीब एक दर्जन स्थानों पर पूजा पंडाल आकार लेने लगे हैं। अड़की, तोरपा, कर्रा, रनिया और मुरहू प्रखंडों में भी पूजा समितियां सक्रिय हैं। कई जगह समितियों का गठन और भूमि पूजन पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा और विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। खूंटी शहर में पिपराटोली, मिश्राटोली, मेन रोड, हरि मंदिर, भगत सिंह चौक, कर्रा रोड, बाजारटांड़, तोरपा रोड, खूंटी टोली, सिलादोन और कुंजला सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजन की तैयारी चल रही है।

पंडाल निर्माण के लिए पश्चिम बंगाल के आसनसोल, कंटई, मेदिनीपुर और पुरुलिया समेत कई इलाकों से कारीगर खूंटी पहुंचे हैं। वे बांस, कपड़े, जूट और दूसरी सामग्रियों से अलग-अलग स्वरूप तैयार कर रहे हैं। विद्युत सज्जा की जिम्मेदारी चंदननगर के कारीगरों के साथ स्थानीय एजेंसियों को भी दी गई है।

इस बार कई पूजा समितियों ने पर्यावरण अनुकूल और थीम आधारित पंडालों को प्राथमिकता दी है। भगत सिंह चौक की सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति जूट से बनी बांट-काठी का इस्तेमाल कर पंडाल बनवा रही है। वर्ष 1959 से पूजा आयोजित कर रही इस समिति ने आयोजन पर करीब 13 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी है। समिति के अनुसार मां दुर्गा की लगभग 15 फीट ऊंची प्रतिमा कोलकाता में तैयार हो रही है।

नेताजी चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने भी भूमि पूजन के बाद निर्माण शुरू करा दिया है। समिति के मुताबिक करीब 15 लाख रुपये की लागत से लगभग 50 फीट ऊंचा और 110 फीट लंबा पर्यावरण अनुकूल, थीम आधारित पंडाल बनाया जा रहा है। कारीगर इसे अंतिम स्वरूप देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

पंडालों के अलावा रोशनी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेलों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक शुरू हुई इन गतिविधियों से त्योहार की चहल-पहल बढ़ने लगी है। समितियां नवरात्र से विजयादशमी तक होने वाले आयोजनों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाने की तैयारियों में जुटी हैं।