गंगा उत्सव के तहत साहिबगंज में आयुष वाटिका स्थापित, औषधीय पौधे लगाए गए

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत स्थापित आयुष वाटिका के माध्यम से गंगा संरक्षण को जैव विविधता, हरित क्षेत्र और पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों के संवर्धन से जोड़ा गया है।

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साहिबगंज में आयुष वाटिका की स्थापना के दौरान औषधीय पौधों का रोपण

साहिबगंज में गंगा उत्सव 2026 के तहत औषधीय उद्यान की स्थापना की गई है। आयुष वाटिका नाम से विकसित इस उद्यान की शुरुआत नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत जिला गंगा समिति और जिला उद्यान कार्यालय ने मिलकर की। कार्यक्रम में दोनों विभागों के प्रतिनिधियों और समिति के सदस्यों ने पौधरोपण किया।

इस पहल का उद्देश्य गंगा संरक्षण के दायरे को नदी की स्वच्छता से आगे ले जाना है। वाटिका के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता बचाने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। इसे पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से भी जोड़ा गया है।

उद्यान में तुलसी, एलोवेरा, अश्वगंधा, शतावरी और निर्गुंडी के पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ लेमनग्रास, ब्राह्मी, स्टीविया और गिलोय जैसी औषधीय तथा सुगंधित वनस्पतियों का भी रोपण हुआ। ये पौधे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में औषधीय वनस्पतियों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।

आयुष वाटिका में उपयोगी वृक्षों को भी स्थान देने की योजना है। इनमें नीम, आंवला, अर्जुन, अशोक और जामुन शामिल हैं। इस तरह उद्यान को अलग-अलग प्रकार की औषधीय वनस्पतियों और पेड़ों के संरक्षण के साझा केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि गंगा का संरक्षण केवल जल और तट की सफाई तक सीमित नहीं है। नदी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी इस प्रयास का हिस्सा है। पौधरोपण को इसी व्यापक पर्यावरणीय दृष्टिकोण से जोड़ा गया।

गंगा उत्सव के दौरान स्थापित यह वाटिका स्थानीय स्तर पर प्रकृति के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ाने की पहल है। इसके जरिए औषधीय पौधों के संवर्धन के साथ लोगों को उनके संरक्षण और उपयोगिता के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया गया है।