गढ़वा शहर से होकर बहने वाली दानरो नदी के किनारे कचरा डालने की समस्या फिर सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टंडवा के भगलपुर मुहल्ले में नदी तट पर करीब 15 दिनों से कचरा जमा किया जा रहा है। यह दावा भी किया गया है कि कचरे पर मिट्टी डालकर वहां रास्ता बनाया जा रहा है। इससे आसपास दुर्गंध फैलने और नदी का पानी प्रभावित होने की चिंता बढ़ी है।
इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर गढ़वा उपायुक्त के नेतृत्व में गठित समिति ने सितंबर में एक कचरा डंपिंग स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद संबंधित स्थान पर कचरा डालना रोक दिया गया था। अब नदी के दूसरी ओर कचरा पहुंचने की शिकायत ने निर्देशों के पालन और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला दीपक शर्मा की ओर से अधिकरण में दर्ज कराए गए प्रकरण से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन को स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश मिला था। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि एक निजी खेत में लगभग एक सप्ताह तक कचरा डाला गया, लेकिन जगह भरने के बाद भगलपुर मुहल्ले का उपयोग शुरू हो गया।
गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में 21 वार्ड हैं। इन वार्डों और मुख्य सड़कों से प्रतिदिन करीब 14 से 15 ट्रैक्टर कचरा निकलने का दावा किया गया है। स्थायी निस्तारण व्यवस्था नहीं होने के कारण नगर निकाय के सामने रोज निकलने वाले कचरे को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और वैज्ञानिक ढंग से उसके प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है।
नगर परिषद ने शहर के पास सुखबाना गांव के केरवा टोला में करीब 10 एकड़ जमीन की घेराबंदी कराई है। हालांकि ग्रामीणों की आपत्ति के कारण वहां कचरा डालने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। पास में लहसुनिया पहाड़ होने से पर्यावरणीय मंजूरी लंबित बताई गई है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, इस स्थल से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में भी है और वहां कचरा डालने पर रोक लगी हुई है।
नदी किनारे घरेलू कचरा, प्लास्टिक और सड़ी सामग्री जमा रहने से मिट्टी तथा पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। बारिश में अपशिष्ट बहकर दूसरे हिस्सों या जलस्रोतों तक पहुंच सकता है। मौजूदा शिकायत के बीच दानरो नदी को प्रदूषण से बचाने और शहर के कचरे के लिए स्थायी, वैज्ञानिक निस्तारण व्यवस्था तैयार करने की जरूरत फिर केंद्र में आ गई है।