गढ़वा के कधवन में 230 मतदाताओं के फॉर्म-7 पर विवाद, एसडीओ से जांच की मांग

कधवन के ग्रामीणों ने करीब 230 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के कथित प्रयास की शिकायत की है। एसडीओ ने जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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कधवन गांव के मतदाताओं के फॉर्म-7 संबंधी शिकायत का सांकेतिक दृश्य

गढ़वा जिले के श्री बंशीधर नगर प्रखंड स्थित कधवन गांव में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित रूप से फॉर्म-7 जमा किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन मतदान केंद्रों से जुड़े करीब 230 मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारी सह एसडीओ को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बुधवार को पंचायत के मुखिया फिरदौस अंसारी के नेतृत्व में ग्रामीण अनुमंडल कार्यालय पहुंचे। शिकायत में बूथ संख्या 271, 272 और 273 का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित फॉर्म बीएलओ के पास जमा कर उनकी प्राप्ति भी ली गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कुछ फॉर्म की प्रतियां सुरक्षित रख लीं।

ग्रामीणों ने दावा किया है कि जिन लोगों के नाम से आवेदन भरे गए, वे जीवित हैं और कधवन गांव में ही रह रहे हैं। इसके बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का कथित प्रयास हुआ। कुछ फॉर्म पर संबंधित मतदाता के बजाय अन्य लोगों के हस्ताक्षर होने का आरोप भी लगाया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

शिकायत में दो बूथ लेवल एजेंट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने फॉर्म में दर्ज जानकारी, हस्ताक्षर और उन्हें जमा करने की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन कराने की मांग की है। आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

निर्वाचन पदाधिकारी सह एसडीओ प्रभाकर मिर्धा ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि निर्धारित प्रक्रिया और उचित कारण के बिना किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने पर आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। कधवन के ग्रामीणों की शिकायत अब इसी प्रक्रिया की प्रामाणिकता और दस्तावेजों के सत्यापन पर केंद्रित है। जांच में यह देखा जाना है कि आवेदन किसने भरे, उनमें दी गई जानकारी सही है या नहीं और हस्ताक्षर संबंधित मतदाताओं के हैं या किसी अन्य व्यक्ति के।