गढ़वा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिले के कॉलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई जारी रखने की मांग उठाई है। संगठन ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय द्वारा स्नातकोत्तर शिक्षा को विश्वविद्यालय विभाग तक सीमित रखने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि व्यवस्था बहाल नहीं होने पर कॉलेजों में तालाबंदी की जाएगी।
अभाविप के राज्य विश्वविद्यालय कार्य संयोजक मंजुल शुक्ल ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि कॉलेजों से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम हटने का असर जिले के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच पर पड़ेगा। उनके अनुसार, गढ़वा भौगोलिक रूप से विस्तृत और ग्रामीण बहुल जिला है, इसलिए स्थानीय स्तर पर पढ़ाई की सुविधा महत्वपूर्ण है।
संगठन का कहना है कि सुदूर प्रखंडों के विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए मेदिनीनगर या दूसरे शहरों में जाना पड़ा तो दूरी, आवागमन, आवास और अतिरिक्त खर्च जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। अभाविप ने आशंका जताई कि आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ विद्यार्थी स्नातक के बाद पढ़ाई छोड़ सकते हैं।
परिषद ने यह भी कहा कि दूर शहर जाकर पढ़ने की अनुमति या आर्थिक क्षमता हर परिवार के पास नहीं होती और इसका प्रभाव विशेष रूप से छात्राओं तथा ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। संगठन के मुताबिक, स्थानीय सुविधा सीमित होने से उच्च शिक्षा के अवसरों में असमानता बढ़ने की आशंका है।
जिला संयोजक राजा यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नामधारी महाविद्यालय में पहले से संचालित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को बंद करने के शैक्षणिक, प्रशासनिक और कानूनी आधार स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि निर्णय लेते समय विद्यार्थियों के हित और क्षेत्रीय जरूरत का मूल्यांकन किस स्तर पर किया गया।
अभाविप ने नामधारी कॉलेज में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पुनः शुरू करने, सत्र 2026-28 के लिए नामांकन तत्काल खोलने और आवश्यक शिक्षक व आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों या तालाबंदी की चेतावनी पर किसी प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध सूचना में नहीं दिया गया है।