गढ़वा जिले में पलामू टाइगर रिजर्व से सटे चार प्रखंडों के वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। रंका, रमकंडा, भंडरिया और बड़गड़ के जंगलों में संभावित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पेड़ों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
वनकर्मियों को जंगल में मिले पगमार्क की जांच की गई। इसके साथ ही पहले सामने आए मवेशियों के शिकार के प्रमाणों को भी आधार बनाया गया। गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम के अनुसार, इन संकेतों की जांच के बाद संबंधित वन क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
हालांकि, बाघ अभी तक लगाए गए कैमरा ट्रैप में दर्ज नहीं हुआ है। वन विभाग ने उसकी गतिविधि और संभावित रास्तों की जानकारी जुटाने के लिए निगरानी की व्यवस्था की है। विभागीय टीम जंगल के प्रभावित हिस्सों में ट्रैकिंग भी कर रही है।
वन विभाग ने आसपास रहने वाले ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। लोगों को सुबह और शाम के समय जंगल में नहीं जाने तथा बिना आवश्यकता वन क्षेत्र में प्रवेश करने से बचने की सलाह दी गई है। ये दोनों समय वन्यजीवों की गतिविधि के लिहाज से संवेदनशील माने जा रहे हैं।
ग्रामीणों से कहा गया है कि बाघ की गतिविधि, पगमार्क या किसी अन्य संबंधित संकेत की जानकारी मिलने पर वे तुरंत वन विभाग को सूचित करें। विभाग ने लोगों से स्वयं बाघ के पास जाने या जंगल के भीतर उसकी तलाश करने के बजाय अधिकृत टीम को सूचना देने की अपील की है।
रंका, रमकंडा, भंडरिया और बड़गड़ के वन क्षेत्र पलामू टाइगर रिजर्व से सटे हुए हैं। फिलहाल विभाग का ध्यान कैमरा ट्रैप और मैदानी निगरानी से बाघ की स्थिति का पता लगाने पर है। ग्रामीणों के लिए जारी सावधानी संबंधी निर्देश निगरानी जारी रहने तक महत्वपूर्ण रहेंगे।