गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में एक जंगली हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। विश्रामपुर गांव के पिपरादादर टोले में जंगल के किनारे हाथी का शव मिलने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने से पहले मौत के कारण पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम के अनुसार, विभाग को सोमवार सुबह करीब आठ बजे हाथी के मृत पड़े होने की सूचना मिली थी। इसके बाद वन विभाग की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया। अधिकारी ललन कुमार समेत विभाग के अन्य कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण किया।
विभागीय टीम हाथी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों को समझने के लिए आसपास के इलाके से भी जानकारी जुटा रही है। वास्तविक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल विभाग ने करंट, बीमारी या किसी अन्य संभावित वजह की पुष्टि नहीं की है।
यह घटना पश्चिमी सिंहभूम में एक हथिनी की मौत के तीन दिन बाद सामने आई है। वहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हथिनी के गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह करीब एक महीने बाद नर बच्चे को जन्म देने वाली थी। लगातार सामने आई इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
विश्रामपुर पंचायत क्षेत्र में पहले भी हाथियों की मौत के मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2019 में नया टोला क्षेत्र में एक जंगली हाथी की करंट लगने से मौत हुई थी। अगस्त 2023 में भौंरी गांव के पास जंगल के किनारे एक हाथी शावक मृत मिला था।
रंका और आसपास के जंगलों में हाथियों की आवाजाही होती रही है। ग्रामीणों के अनुसार, झुंड कई बार गांवों और खेतों तक पहुंचते हैं, जिससे फसलों तथा संपत्ति को नुकसान होने का खतरा रहता है। ग्रामीणों ने मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों की सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय करने की मांग की है।