गढ़वा के रमकंडा-भंडरिया जंगलों में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

पगमार्क और पशुओं के शिकार के प्रमाण मिलने के बाद वन विभाग ने रमकंडा-भंडरिया क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई है। ग्रामीणों को सुबह-शाम जंगल में जाने से बचने को कहा गया है।

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गढ़वा के रमकंडा-भंडरिया वन क्षेत्र में मिले बाघ के पगमार्क

गढ़वा जिले के रमकंडा और भंडरिया वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। विभाग के अनुसार, जंगल में मिले पगमार्क और पशुओं के शिकार के प्रमाणों की जांच के आधार पर यह पुष्टि की गई। पलामू टाइगर रिजर्व से सटे इन इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और वन विभाग की टीमें खोज तथा निगरानी अभियान चला रही हैं। हालांकि, अभी तक कैमरा ट्रैप में बाघ की तस्वीर दर्ज नहीं हुई है। जिन स्थानों पर उसकी गतिविधि के संकेत मिले हैं, वहां अतिरिक्त कैमरे लगाने की प्रक्रिया भी चल रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में रंका के ढेगुरा जंगल में तीन बकरियों और एक बछड़े के शिकार की बात सामने आई थी। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के शिकार की सूचना मिली थी। गुरुवार को भंडरिया-रमकंडा-बड़गड़ वन क्षेत्र में पगमार्क मिलने के बाद आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई।

गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम के अनुसार, पगमार्क की जांच के बाद विभाग ने भंडरिया और रमकंडा क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संबंधित जंगलों में विभागीय टीमें लगातार नजर रख रही हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को खासकर सुबह और शाम जंगल की ओर नहीं जाने तथा अनावश्यक रूप से वन क्षेत्र में प्रवेश से बचने को कहा गया है। बाघ की मौजूदगी या गतिविधि से जुड़ी कोई सूचना मिलने पर उसे तुरंत विभाग तक पहुंचाने का आग्रह भी किया गया है।

रमकंडा और भंडरिया का वन क्षेत्र पलामू टाइगर रिजर्व से सटा है। पीटीआर का वन्यजीव गलियारा छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जंगलों से जुड़ता है, जिससे वन्यजीवों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने की संभावना रहती है। विभाग ने कहा है कि उसका प्रयास ग्रामीणों को सतर्क रखने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।