रंगामाटिया में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती पर ग्रामसभा, ग्रामीणों ने उठाई जांच और रद्द करने की मांग

गम्हरिया प्रखंड के रंगामाटिया गांव में ग्रामसभा कर ग्रामीणों ने सरकारी जमीन की पुरानी बंदोबस्ती पर आपत्ति जताई और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

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सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड की चमारू पंचायत स्थित रंगामाटिया गांव में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने बंदोबस्ती को नियमों के विपरीत बताते हुए जिला प्रशासन से इसे रद्द करने और जमीन को सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की मांग की।

ग्रामसभा में ग्रामीणों ने बताया कि गांव के खाता संख्या 218 और प्लॉट संख्या 1003 में कुल 4 एकड़ 40 डिसमिल सरकारी जमीन दर्ज है। उनका कहना है कि इसमें से एक एकड़ जमीन करीब 25 वर्ष पहले सुसेन महतो के नाम पर बंदोबस्त की गई थी। ग्रामीणों ने इसी बंदोबस्ती की वैधता और शर्तों के पालन पर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि निर्धारित अवधि के भीतर जमीन पर खेती या दखल से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं की गईं। उन्होंने संबंधित बंदोबस्ती प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर सक्षम अधिकारी आवंटन रद्द कर सकते हैं। हालांकि ग्रामसभा में रखे गए इन दावों पर प्रशासनिक जांच या निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

विवादित जमीन पर पहले भी तनाव की स्थिति बन चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, जिस स्थान पर उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण प्रस्तावित था, वहां बनाए जा रहे एक मकान को पूर्व में ग्रामीणों ने तोड़ दिया था। इसके बाद जमीन की बंदोबस्ती और उसके संभावित सरकारी उपयोग को लेकर विवाद लगातार बना हुआ है।

ग्रामसभा में यह भी आरोप लगाया गया कि बंदोबस्ती पाने वाले व्यक्ति के पास पहले से निजी जमीन और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कंपनी है। यह ग्रामीणों का पक्ष है और उपलब्ध विवरण में संबंधित व्यक्ति या प्रशासन की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि सक्षम प्राधिकार की जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बंदोबस्ती गलत पाए जाने पर उसे रद्द कर पूरी जमीन सुरक्षित रखी जाए, ताकि भविष्य में स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल या अन्य जनकल्याणकारी संस्थान के निर्माण में कानूनी अथवा व्यावहारिक बाधा न आए।