गढ़वा में जीवित्पुत्रिका यानी जिउतिया व्रत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताएं शनिवार को 24 घंटे का निर्जल उपवास रखेंगी। पर्व को लेकर घरों के साथ शहर के बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है।
इस व्रत में प्रकृति से जुड़ी कई स्थानीय और पारंपरिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। नहाय-खाय के दौरान सखुआ के दातुन, सखुआ के पत्तों से बने दोना-पत्तल, खीरे की लता के पत्ते, मड़ुआ का आटा, नोनी का साग और बराई की दाल की जरूरत होती है। कांदा और झिंगी जैसी सब्जियां भी परंपरा का हिस्सा हैं।
पर्व से जुड़ी सामग्री की मांग बढ़ने का असर कीमतों पर भी दिखाई दिया। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में मड़ुआ का आटा करीब 300 रुपये प्रति किलो तथा नोनी का साग और बराई की दाल 400-400 रुपये प्रति किलो बिकी। देसी पेंहटा की कीमत 600 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गई।
पूजा के लिए पलाश के पेड़ की टहनी और काश के फूल भी खरीदे गए। बाजार में इनकी कीमत 50 रुपये से 300 रुपये तक रही। पर्व की आवश्यक वस्तुएं जुटाने के लिए महिलाओं की भीड़ दुकानों पर बनी रही। एक सब्जी विक्रेता के अनुसार गुरुवार को व्रत में इस्तेमाल होने वाली कुछ सब्जियों के दाम शुक्रवार की तुलना में करीब दोगुने थे।
पूजा सामग्री के एक विक्रेता ने कीमतों में करीब 20 प्रतिशत उछाल की जानकारी दी। मांग मुख्य रूप से उन वस्तुओं की रही, जिनका जीवित्पुत्रिका की पारंपरिक पूजा और नहाय-खाय में उपयोग होता है। निर्जल उपवास के कारण व्रत को कठिन धार्मिक अनुष्ठानों में गिना जाता है।
स्थानीय पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार अष्टमी शनिवार सुबह 9:54 बजे शुरू होकर रविवार सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी। पूजा के लिए शनिवार शाम 6:45 बजे से रात 8:17 बजे तक का समय बताया गया है।