धनबाद के झारखंड मैदान में प्राकृतिक सामग्रियों से आकार ले रहा शीश महल पंडाल

झारखंड मैदान में अंडमान-निकोबार की आदिवासी संस्कृति पर आधारित पंडाल तैयार हो रहा है। करीब 32 लाख रुपये की इस परियोजना में बांस, पत्तों और जूट जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

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धनबाद के झारखंड मैदान में प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार होता दुर्गापूजा पंडाल

धनबाद के झारखंड मैदान में दुर्गापूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। सत्यम शिवम सुंदरम कमेटी इस बार शीश महल की थीम पर पूजा पंडाल बनवा रही है, जिसमें अंडमान-निकोबार की आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की जाएगी। करीब 32 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहे पंडाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की भी योजना है।

पंडाल की संरचना और सजावट में बांस, होगला पत्ता, नारियल की माला, चटाई, पाट काठी, पेड़ की छाल और डाल के साथ ताल पत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण को अंतिम रूप देने के लिए मेदिनीपुर से आए करीब 40 कारीगर काम कर रहे हैं। पूरी तैयारी राज कुमार पांडा की देखरेख में चल रही है।

पूजा की प्राकृतिक थीम केवल पंडाल तक सीमित नहीं रहेगी। मां दुर्गा की प्रतिमा भी अलग-अलग प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार करने की योजना है। प्रतिमा निर्माण पूर्व मेदिनीपुर के मूर्तिकार चितरंजन दास कर रहे हैं। बांस और होगला पत्ते के अलावा खजूर के फूल, कैथा बेल, काश फूल तथा बैंगन फल के उपयोग की जानकारी दी गई है।

आयोजन समिति के अनुसार, पंडाल और प्रतिमा की एकीकृत सजावट के जरिये लोगों को प्रकृति के महत्व तथा प्रदूषण घटाने के प्रति जागरूक किया जाएगा। कमेटी झारखंड मैदान में पिछले 26 वर्षों से दुर्गापूजा आयोजित कर रही है और इस बार उसका 27वां उत्सव होगा। मेले की रोशनी और सजावट का काम भी मेदिनीपुर के कारीगरों को सौंपा गया है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए परिसर में 20 सीसीटीवी कैमरे लगाने और व्यवस्था संभालने के लिए करीब 160 स्वयंसेवकों को तैनात करने की तैयारी है। महिलाओं के लिए विशेष शौचालय की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। आयोजन स्थल पर प्रशासन की ओर से एक एंबुलेंस और अग्निशमन वाहन उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।

भीड़ की संभावना को देखते हुए समिति ने अभिभावकों से छोटे बच्चों की जेब में उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर रखने की अपील की है, ताकि बिछड़ने की स्थिति में परिजनों तक पहुंचने में सहायता मिल सके। आयोजन के दौरान आदिवासी संस्कृति और पर्यावरण की थीम पर विभिन्न झांकियां दिखाई जाएंगी। प्रतिमा विसर्जन 23 अक्टूबर को निर्धारित है।