गढ़वा में धान की रोपनी 85 प्रतिशत पूरी, अगस्त की बारिश से खेती ने पकड़ी रफ्तार

जून-जुलाई में कम बारिश से पिछड़ी गढ़वा की धान खेती को अगस्त में राहत मिली। जिले में 56,400 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले करीब 47,940 हेक्टेयर में रोपनी पूरी हुई।

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गढ़वा जिले के खेत में रोपी गई धान की फसल

गढ़वा जिले में मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद अगस्त की बारिश से धान की खेती ने रफ्तार पकड़ी है। जिला कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त तक निर्धारित लक्ष्य के करीब 85 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी पूरी हो चुकी थी। इससे शुरुआती महीनों में पानी की कमी का सामना कर रहे किसानों को राहत मिली है।

इस खरीफ मौसम में जिले के लिए 56,400 हेक्टेयर में धान आच्छादन का लक्ष्य तय किया गया था। इसके मुकाबले करीब 47,940 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपनी होने की जानकारी दी गई है। मझिआंव प्रखंड में भी लक्ष्य के लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र में धान लगाया जा चुका था।

जून और जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने के कारण रोपनी काफी पीछे चल रही थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 13 अगस्त तक जिले में सामान्य 779.4 मिलीमीटर के मुकाबले 327.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। जून में 138.8 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 15.6 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि जुलाई में सामान्य 362.4 मिलीमीटर के स्थान पर 212.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

बारिश की कमी का असर शुरुआती आच्छादन पर साफ दिखाई दिया। एक अगस्त तक लक्ष्य के केवल 4.27 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी हो सकी थी। नौ अगस्त को यह आंकड़ा 12.18 प्रतिशत और 13 अगस्त तक करीब 31 प्रतिशत पहुंचा। अगस्त के दूसरे और तीसरे सप्ताह में बारिश होने के बाद खेतों में पानी और नमी उपलब्ध हुई तथा रोपनी तेजी से आगे बढ़ी।

हालांकि, इस बार धान की रोपनी का बड़ा हिस्सा निर्धारित समय से देर से हुआ है। ऐसे में आगे पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम की आवश्यकता बनी रहेगी। शुरुआती सूखे के कारण फसल की उत्पादकता को लेकर किसानों की चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

जिले में इस वर्ष कुल खरीफ खेती का लक्ष्य 1,37,840 हेक्टेयर रखा गया था। मानसून की शुरुआत में कम बारिश से दूसरी खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई, लेकिन बाद की बारिश से उनके आच्छादन में भी तेजी आई। धान जिले की प्रमुख खरीफ फसल होने के कारण इसकी स्थिति पर किसान और कृषि विभाग नजर बनाए हुए हैं।