गढ़वा जिले में स्कूली बच्चों के परिवहन की जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं। निरीक्षण वाले दिन संबंधित विद्यालय की पांच बसों में से केवल दो उपलब्ध थीं। जांच में इन दोनों बसों में जीपीएस और फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। शेष तीन बसों के खराब होने के कारण उनका संचालन नहीं किए जाने की जानकारी दी गई।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने जांच टीम को बताया कि बच्चों को लाने और घर पहुंचाने के लिए संचालक ने पांच बसों की व्यवस्था की है। तीन बसें बंद मिलने के बाद यह प्रश्न भी सामने आया कि उनके स्थान पर बच्चों के लिए कौन-सी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। उपलब्ध बसों में मिली कमियों को आपात स्थिति और वाहनों की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है।
निरीक्षण में यह भी पता चला कि कई बच्चे टेंपो से स्कूल पहुंचते हैं। इन वाहनों की व्यवस्था विद्यालय नहीं, बल्कि अभिभावक अपने स्तर पर करते हैं। ऐसे में वाहन के चयन, चालक की पहचान और बच्चों की यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अभिभावकों पर रहती है।
टेंपो से आवागमन की जानकारी मिलने के बाद जांच टीम ने विद्यालय प्रबंधन को अभिभावकों को संभावित हादसों और सुरक्षा जोखिमों के बारे में स्पष्ट रूप से बताने का निर्देश दिया। प्रबंधन से यह जानकारी भी देने को कहा गया कि टेंपो विद्यालय की ओर से उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं और उनकी व्यवस्था परिवारों ने स्वयं की है।
इससे पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी जगरनाथ लोहरा और मोटरयान निरीक्षक मनीष कुमार गुप्ता की जांच में भी स्कूली वाहनों से संबंधित गंभीर खामियां मिली थीं। आरके पब्लिक स्कूल, हूर में 15 सीट वाली बस में 32 और 22 सीट वाली बस में 41 बच्चे सवार पाए गए थे। उस जांच में एक चालक के मादक पदार्थ के सेवन की स्थिति में होने की बात भी सामने आई थी। वाहनों के कागजात और अन्य सुरक्षा मानकों की भी पड़ताल की गई थी।
लगातार सामने आई कमियों के बाद स्कूली बसों के साथ निजी टेंपो से बच्चों की आवाजाही पर भी निगरानी की आवश्यकता सामने आई है। ताजा निरीक्षण में दिए गए निर्देशों का केंद्र अभिभावकों को जोखिमों की जानकारी देना है। वहीं बसों की उपलब्धता, जरूरी सुरक्षा उपकरण और निर्धारित क्षमता के अनुपालन की नियमित जांच बच्चों के सुरक्षित आवागमन से सीधे जुड़ी हुई है।