गढ़वा में 4,235 स्ट्रीट और हाईमास्ट लाइट के कनेक्शन पर सवाल, विभाग ने मांगी रिपोर्ट

गढ़वा जिले में हजारों स्ट्रीट और हाईमास्ट लाइट के वैध बिजली कनेक्शन, मीटर और बिल भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं है। बिजली विभाग ने उपविकास आयुक्त से विस्तृत जानकारी मांगी है।

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गढ़वा में सड़क किनारे लगी स्ट्रीट और हाईमास्ट लाइटें

गढ़वा जिले में सड़कों और चौराहों पर लगाई गई 4,235 स्ट्रीट और हाईमास्ट लाइट के बिजली कनेक्शन तथा बिल भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। बिजली विभाग के मुताबिक कई लाइट के कनेक्शन और मीटर की स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभाग ने बिना वैध कनेक्शन चल रही लाइटों से हर महीने राजस्व नुकसान होने की आशंका जताई है।

इस मामले में बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता ने पत्रांक 708 के माध्यम से उपविकास आयुक्त से जानकारी मांगी है। पत्र में लगाई गई हाईमास्ट लाइटों की सूची देते हुए उनके कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है। विभाग के पास जिले में विभिन्न योजनाओं से लगी सभी लाइटों की समेकित संख्या भी उपलब्ध नहीं है।

वर्ष 2019 से 2024 के बीच गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में विधायक मद से 165 हाईमास्ट लाइट लगाई गई थीं। प्रति लाइट 1.89 लाख रुपये की लागत के आधार पर इन पर 3.11 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ। ये लाइट मुख्य रूप से चौराहों पर लगाई गई हैं और सामान्य स्ट्रीट लाइट की तुलना में अधिक बिजली इस्तेमाल करती हैं।

ग्रामीण इलाकों में विभिन्न योजनाओं के तहत 4,070 वेपर और स्ट्रीट लाइट भी लगाई गई हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रति लाइट 1,850 रुपये की दर से इन पर कुल 75.29 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अतिरिक्त 14वें और 15वें वित्त आयोग तथा पंचायतों की योजनाओं से लगी लाइटों की कुल संख्या और कनेक्शन का पूरा ब्योरा स्पष्ट नहीं है।

शहरी निकायों में बकाया बिल का मामला भी सामने आया है। मझिआंव नगर पंचायत पर स्ट्रीट लाइट से संबंधित 1.26 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया बताया गया है। गढ़वा नगर परिषद पर भी 4.22 लाख रुपये का बकाया है। मझिआंव में प्रति लाइट हर महीने 20 यूनिट खपत और 7.60 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल निर्धारित किया जाता है।

कार्यपालक अभियंता महेश्वर कुमार के अनुसार स्ट्रीट लाइटों के लिए नियमानुसार कनेक्शन लेना और बिजली बिल चुकाना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया या प्रखंड विकास पदाधिकारी के नाम से कनेक्शन लिया जा सकता है और भुगतान पंचायत अथवा ग्रामीण विकास मद से किया जा सकता है। विभाग अब प्रशासन से विवरण मिलने के बाद कनेक्शन और भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा कर रहा है।