गावां में जंगली बिरनियों के हमले से पखवाड़े भर में तीन लोगों की मौत

गिरिडीह के गावां प्रखंड में जंगली बिरनियों के लगातार हमलों से ग्रामीण भयभीत हैं। तीन मौतों के बाद प्रशासन और वन विभाग से बचाव के ठोस उपाय करने की मांग की गई है।

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गिरिडीह के गावां प्रखंड में जंगली बिरनियों के हमलों से भयभीत ग्रामीण क्षेत्र

गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड में जंगली बिरनियों के हमले गंभीर चिंता का कारण बन गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पखवाड़े भर में ऐसे हमलों से तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण खेतों, जंगलों और आसपास के इलाकों में जाने से ग्रामीण डर रहे हैं।

ताजा घटना शनिवार शाम सेरुआ गांव में हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिरनियों के हमले में 75 वर्षीय धनेश्वर यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें गावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। बेलाटांड़ अस्पताल में देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इससे पहले एक सितंबर को बिरने गांव निवासी सरकारी शिक्षक देवेंद्र कुमार सिंह की भी बिरनियों के हमले में मौत हुई थी। उस घटना में उनके पुत्र जीवन सिंह समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है। इसके बाद सात सितंबर को सिरी गांव के 70 वर्षीय कालेश्वर यादव पर खेत के पास टहनियां काटते समय हमला हुआ था। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई थी।

स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रखंड क्षेत्र में अब तक 100 से अधिक लोग बिरनियों के डंक से घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन करीब पांच से सात प्रभावित लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ये आंकड़े स्थानीय लोगों के हवाले से सामने आए हैं।

बार-बार हो रहे हमलों के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि खेत और जंगल से जुड़े रोजमर्रा के काम के दौरान जोखिम बढ़ गया है। अलग-अलग गांवों में हुई मौतों ने समस्या के दायरे और लोगों की चिंता को और गंभीर बना दिया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका आग्रह है कि प्रभावित इलाकों में बचाव के उपाय किए जाएं, ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उपलब्ध जानकारी में प्रशासन या वन विभाग की ओर से किसी विशेष कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।