गिरिडीह के डोर स्टेप डिलीवरी टेंडर में मालवाहक के रूप में दर्ज मिले दोपहिया वाहन

गिरिडीह में सरकारी अनाज की डोर स्टेप डिलीवरी के लिए सौंपी गई वाहन सूचियों में कुछ दोपहिया वाहनों को मालवाहक बताए जाने का मामला सामने आया है। परिवहन विभाग के स्तर पर जांच जारी है।

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गिरिडीह में डोर स्टेप डिलीवरी टेंडर की वाहन सूची से जुड़ा मामला

गिरिडीह जिले में जन वितरण प्रणाली के डीलरों तक सरकारी अनाज पहुंचाने के लिए हुए डोर स्टेप डिलीवरी टेंडर की वाहन सूचियों पर सवाल उठे हैं। टेंडर पाने वाले संवेदकों की ओर से विभाग को दी गई कुछ सूचियों में मालवाहक के रूप में दर्ज वाहन जांच में दोपहिया पाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल दो से तीन प्रखंडों की सूचियों में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं।

डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था के तहत सरकारी गोदाम से अनाज उठाकर राशन डीलरों तक पहुंचाया जाता है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले संवेदकों को वाहन के प्रकार समेत पूरी सूची विभाग को सौंपनी होती है। टेंडर मिलने के बाद सूचीबद्ध वाहनों से ही अनाज का परिवहन किया जाना है।

बेंगाबाद प्रखंड में ठेका पाने वाले संवेदक ने 27 वाहनों की सूची जमा की थी। इसमें जेएच 11 एबी-3489 नंबर के वाहन को महिंद्रा कंपनी का और 9,259 किलोग्राम क्षमता वाला बताया गया। जिला परिवहन पदाधिकारी के अनुसार, यह नंबर एक बाइक के रूप में पंजीकृत है और उसका स्वामित्व गीता देवी के नाम है।

दूसरे प्रखंड की सूची में जेएच 10 सीयू-1115 और जेएच 10 सीयू-7330 नंबर भी मालवाहक के रूप में दर्ज बताए गए हैं। परिवहन विभाग की जानकारी के मुताबिक पहला नंबर एक बाइक और दूसरा टीवीएस जुपिटर का है। जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि इन वाहनों का उल्लेख टेंडर में मालवाहक के तौर पर किया गया है तथा मामले की आगे जांच की जा रही है।

बेंगाबाद के संवेदक ने शुरुआत में सूची में बाइक का उल्लेख होने से इनकार किया। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि 27 वाहनों वाली सूची में संबंधित नंबर शामिल है, लेकिन यह कैसे दर्ज हुआ, इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने इसे संभावित टाइपिंग की गलती बताया है।

जिला आपूर्ति पदाधिकारी का प्रभार संभाल रहे अधिकारी ने बताया कि संबंधित टेंडर उनके कार्यकाल का नहीं है। उन्होंने फिलहाल अन्य सरकारी कार्य में व्यस्त होने और उसके बाद मामले के बिंदुओं की जांच करने की बात कही। ऐसे में वाहन विवरण में हुई गड़बड़ी का कारण और टेंडर प्रक्रिया पर उसका प्रभाव विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।