गुमला में अवैध खनन रोकने के लिए अनुमंडल और अंचल स्तर पर टास्क फोर्स गठित

जिला प्रशासन ने अवैध खनन और खनिजों के गैरकानूनी परिवहन की निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां बनाई हैं। अधिकारियों को जांच, कार्रवाई और नियमित रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

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गुमला में अवैध खनन और परिवहन की निगरानी के लिए गठित टास्क फोर्स से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

गुमला जिले में खनिजों के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अनुमंडल तथा अंचल स्तर पर विशेष खनन टास्क फोर्स समितियां गठित की हैं। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिलेश्वर महतो की ओर से जारी आदेश के साथ यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

प्रशासन के अनुसार, समितियों का गठन झारखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की रोकथाम) संशोधन नियमावली, 2026 के तहत किया गया है। नई व्यवस्था में संबंधित क्षेत्रों के प्रशासनिक, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से निगरानी तथा कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अनुमंडल स्तर की टास्क फोर्स में संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी अध्यक्ष और सचिव होंगे। संबंधित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और सहायक वन संरक्षक को समिति का सदस्य बनाया गया है। यह समिति अपने क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की समीक्षा करते हुए विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी।

अंचल स्तर पर संबंधित अंचल अधिकारी समिति के अध्यक्ष और सचिव होंगे। स्थानीय थाना प्रभारी तथा संबंधित वन क्षेत्र पदाधिकारी इसके सदस्य रहेंगे। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाने और खनिजों की गैरकानूनी निकासी एवं ढुलाई पर नियमित निगरानी रखने का निर्देश मिला है।

प्रत्येक जांच और उसके आधार पर की गई कार्रवाई का विवरण निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उपायुक्त-सह-अध्यक्ष तथा जिला खनन पदाधिकारी, गुमला को भेजना होगा। आदेश में संबंधित अधिकारियों की क्षेत्रवार जवाबदेही भी तय की गई है, ताकि निरीक्षण और कार्रवाई की प्रगति की नियमित समीक्षा हो सके।

आदेश की प्रतियां गुमला, चैनपुर और बसिया के संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों, वन विभाग के अधिकारियों, अंचल अधिकारियों तथा थाना प्रभारियों को भेजी गई हैं। इस दो-स्तरीय ढांचे के जरिए प्रशासन ने जांच, निगरानी और रिपोर्टिंग को एक समन्वित प्रक्रिया में लाने की व्यवस्था की है।