गुमला जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे खोरा से कुसुमटोली जाने वाले रास्ते पर स्थित एक बंद ईंट भट्ठे में भालुओं के एक परिवार ने बसेरा बना लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार वहां एक जोड़ा और उसके दो छोटे बच्चे रह रहे हैं। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मंगलवार रात भट्ठे और आसपास के इलाके का निरीक्षण किया।
डीएफओ अहमद बेलाल अनवर के निर्देश पर वनपाल राकेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में वनरक्षी प्रवीण तिर्की, रजत किरण डुंगडुंग और पीटर बाड़ा मौके पर पहुंचे। टीम का उद्देश्य भालुओं की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों की जानकारी लेना था। विभाग अब इस क्षेत्र पर लगातार नजर रख रहा है।
वनपाल ने स्थानीय लोगों से भालुओं के पास नहीं जाने, उन्हें छेड़ने या वहां से खदेड़ने की कोशिश नहीं करने को कहा है। दोनों बच्चों के बहुत छोटे होने के कारण ऐसी कोई गतिविधि जोखिम बढ़ा सकती है। ग्रामीणों को विशेष रूप से रात के समय इस रास्ते से आवागमन नहीं करने की सलाह दी गई है।
बताया गया है कि ईंट भट्ठा कई महीनों से बंद पड़ा है। इसके पास भरदा पहाड़ है, जहां पहले से भालुओं का बसेरा होने और आसपास के क्षेत्र में उनके दिखाई देने की जानकारी ग्रामीण देते रहे हैं। वन विभाग का मानना है कि शांत और खाली पड़े परिसर के कारण भालुओं ने इसे सुरक्षित आश्रय के रूप में चुना होगा।
विभाग के मुताबिक भालू कई महीनों से भट्ठा परिसर में रह रहे हैं, लेकिन अब तक आसपास के क्षेत्र में किसी तरह की जान-माल की हानि की सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद बच्चों सहित भालुओं की मौजूदगी को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी बताया गया है।
वन अधिकारियों ने संभावना जताई है कि बच्चे बड़े होने के बाद भालू स्वयं इस स्थान से चले जा सकते हैं। तब तक विभाग उनकी गतिविधियों की निगरानी जारी रखेगा। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी वन विभाग को दें।