गोड्डा के डेरमा गांव में 43 वर्षों से जारी है अखंड दुर्गा सप्तशती पाठ की परंपरा

बसंतराय प्रखंड के डेरमा गांव में नवरात्र की प्रथम पूजा से दशमी की रात तक दुर्गा सप्तशती पाठ होता है। आयोजन का समापन हवन और कन्या भोजन के साथ किया जाता है।

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गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड स्थित डेरमा गांव में शारदीय नवरात्र के दौरान अखंड दुर्गा सप्तशती पाठ की परंपरा इस वर्ष भी जारी है। ग्रामीणों के अनुसार, यह धार्मिक आयोजन पिछले 43 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। प्रथम पूजा के साथ शुरू होने वाला पाठ दशमी की देर रात तक चलता है।

आयोजन के दौरान विद्वान पाठक बारी-बारी से दुर्गा सप्तशती के श्लोकों का पाठ करते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस क्रम में गांव के लोग भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। दशमी को विधि-विधान से हवन और कन्या भोजन कराने के बाद अनुष्ठान का समापन किया जाता है।

अखंड पाठ को संचालित करने में आचार्य हिमांशु शेखर ठाकुर के साथ बिहारी मिश्र, आनंद मिश्र, सचिन कुमार वत्स, नवरत्न झा, सुजीत कुमार झा, सुमन कुमार झा, अभिषेक कुमार झा और संकेत कुमार झा योगदान दे रहे हैं। पाठ का क्रम बनाए रखने के लिए सभी निर्धारित समय पर अपनी जिम्मेदारी संभालते हैं।

पूजा की व्यवस्थाओं में दुर्गा पूजा समिति और नवयुवक संघ की प्रमुख भूमिका है। समिति के अध्यक्ष निखिल कुमार झा, कोषाध्यक्ष शिवम चौधरी और सचिव प्यारे लाल ठाकुर सहित अन्य सदस्य तैयारियों और संचालन में जुटे हैं। नंदू, आशीष और राघव समेत दूसरे कार्यकर्ता भी आयोजन से जुड़े काम संभाल रहे हैं।

ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी ने इस परंपरा को कई पीढ़ियों तक बनाए रखा है। नवरात्र के दिनों में लगातार होने वाला पाठ डेरमा की स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ गया है। समिति, पाठकों, नवयुवक संघ और ग्रामीणों के सहयोग से नौ दिवसीय कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से पूरा करने की तैयारी की गई है।