चतरा के कौलेश्वरी पर्वत रोपवे के लिए स्थल निरीक्षण और मिट्टी जांच जारी

हंटरगंज स्थित कौलेश्वरी पर्वत पर प्रस्तावित रोपवे की तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। टीम प्लेटफॉर्म, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट के संभावित स्थलों का निरीक्षण कर रही है।

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चतरा के कौलेश्वरी पर्वत पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना का स्थल

चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर तकनीकी गतिविधियां जारी हैं। रोपवे का डिजाइन तैयार करने वाली राइट्स लिमिटेड की टीम स्थल निरीक्षण के साथ मिट्टी की जांच कर रही है। परियोजना को क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तकनीकी टीम पिछले चार दिनों से कौलेश्वरी पर्वत पर कैंप कर रही है। निरीक्षण का नेतृत्व अभियंता रंजन माधव कर रहे हैं। टीम रोपवे के लिए प्रस्तावित प्लेटफॉर्म की जगह का अध्ययन करने के अलावा गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और अन्य संभावित निर्माण स्थलों की स्थिति भी देख रही है।

मिट्टी की जांच और स्थल का तकनीकी आकलन परियोजना की शुरुआती प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके आधार पर निर्माण से जुड़ी आवश्यकताओं और प्रस्तावित संरचनाओं के लिए उपयुक्त स्थानों का आकलन किया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में निर्माण शुरू होने या शिलान्यास की नई तारीख की जानकारी नहीं दी गई है।

यह रोपवे परियोजना दिवंगत पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की प्राथमिक योजनाओं में शामिल थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कागजी, प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया था। उनकी इच्छा अपने कार्यकाल में परियोजना का शिलान्यास कराने और निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की थी, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया।

कौलेश्वरी पर्वत चतरा जिले का महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यह स्थान सनातन, जैन और बौद्ध परंपराओं से जुड़ी मान्यताओं के कारण अलग-अलग समुदायों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेश से भी पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी दी गई है।

रोपवे बनने पर पर्वत तक पहुंचने की सुविधा बेहतर होने और कौलेश्वरी को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई जा रही है। मंत्री के निधन के बाद क्षेत्र में मायूसी है, जबकि तकनीकी टीम का निरीक्षण जारी रहने से परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है। इसे धरातल पर उतारने की आगे की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर होगी।