चतरा सड़क मरम्मत के 52.12 लाख रुपये के बकाया दावे पर ठेकेदार को हाईकोर्ट से राहत नहीं

पखा से लेरहो स्कूल तक 10.30 किलोमीटर सड़क की मरम्मत से जुड़े भुगतान विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने ठेकेदार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने उन्हें सक्षम सिविल कोर्ट में दावा पेश करने की छूट दी है।

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झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा जिले में पखा से लेरहो स्कूल तक सड़क की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े बकाया भुगतान के मामले में ठेकेदार को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विवाद के निपटारे के लिए साक्ष्यों की जांच जरूरी है। हालांकि, ठेकेदार को सक्षम सिविल कोर्ट में धन संबंधी दावा पेश करने की स्वतंत्रता दी गई है।

मामला पखा से लेरहो स्कूल तक 10.30 किलोमीटर सड़क की मरम्मत से संबंधित है। ठेकेदार बालेश्वर यादव ने अपनी याचिका में दावा किया था कि काम पूरा करने के बावजूद 52.12 लाख रुपये का भुगतान लंबित रखा गया। उन्होंने 8.80 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी और कार्य से काटी गई पांच प्रतिशत राशि लौटाने की भी मांग की थी।

ठेकेदार का पक्ष था कि विभाग ने काम पूरा होने के बाद भी सड़क की दोबारा मरम्मत करने का निर्देश दिया। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस दावे का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि निर्धारित अवधि और कई बार समय बढ़ाए जाने के बावजूद काम पूरा नहीं किया गया था।

सरकार के अनुसार, 20 जून 2019 को हुए विभागीय निरीक्षण में ह्यूम पाइप की पैरापेट अधूरी रहने, प्रीमिक्स निकलने और ह्यूम पाइप टूटने जैसी कमियां पाई गई थीं। विभाग का कहना था कि इन कमियों को दूर करने के बाद ही बिल का भुगतान किया जाना था।

अदालत को यह भी बताया गया कि सड़क कार्य का कुल अनुबंध 1.75 करोड़ रुपये से अधिक का था और ठेकेदार को अब तक 1,23,80,413 रुपये दिए जा चुके हैं। विभाग के मुताबिक काम पूरा नहीं होने के कारण अंतिम मापी नहीं हो सकी तथा माप पुस्तिका में चौथे रनिंग अकाउंट बिल तक की प्रविष्टियां ही दर्ज हैं।

हाईकोर्ट ने माना कि सरकार ने ठेकेदार की ओर से मांगी गई राशि को स्वीकार नहीं किया है। काम पूरा हुआ या नहीं और बताई गई कमियों की जिम्मेदारी किसकी है, यह मौखिक तथा दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। अदालत ने कहा कि ऐसे विवाद का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका में नहीं किया जा सकता।