चाईबासा के बालकुंज में बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति किया जागरूक

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बालकुंज में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने गतिविधियों और कार्यपत्रकों के जरिये भावनाओं की पहचान, अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच के बारे में जाना।

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चाईबासा स्थित बालकुंज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बच्चों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य का महत्व समझाने के साथ उनके भावनात्मक और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साह के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत सामाजिक सुरक्षा के उपनिदेशक खुशेन्द्र सोन केशरी ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी और रांची की मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोविज्ञान विशेषज्ञ मिट्ठू मुथु वर्गीज भी उपस्थित रहीं।

विशेषज्ञ मिट्ठू मुथु वर्गीज ने बच्चों को अपनी भावनाओं की पहचान करने, उन्हें समझने और उचित तरीके से व्यक्त करने के बारे में बताया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और दैनिक जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के महत्व पर भी चर्चा की।

जागरूकता सत्र को सहभागितापूर्ण बनाने के लिए व्यावहारिक अभ्यास, लेखन पर आधारित कार्यपत्रक और दूसरी गतिविधियां कराई गईं। इनके माध्यम से बच्चों को केवल जानकारी देने के बजाय स्वयं अपनी भावनाओं पर विचार करने और अभिव्यक्ति का अभ्यास करने का अवसर मिला।

आयोजन के दौरान बनाए गए सहज और अनुकूल वातावरण में बच्चों ने सक्रिय भागीदारी की। गतिविधियों का केंद्र आत्म-अभिव्यक्ति, भावनात्मक समझ और सकारात्मक सोच रहा, ताकि बच्चे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को सरल तरीके से समझ सकें।

बालकुंज का यह कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास में मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की भूमिका पर केंद्रित रहा। आयोजन के जरिये उनमें भावनाओं को समझने, अपनी बात व्यक्त करने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दृष्टिकोण अपनाने की समझ विकसित करने का प्रयास किया गया।