चाईबासा के पिल्लई हॉल में निखिल भारत बांग्ला साहित्य सम्मेलन की बिहार-झारखंड क्षेत्रीय समिति का 11वां द्विवार्षिक अधिवेशन शुरू हुआ। दो दिनों के इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि, शिक्षाविद और कलाकार भाग ले रहे हैं। अधिवेशन में भाषा, शिक्षा और साहित्य से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में रखा गया है।
नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश और कोल्हान विश्वविद्यालय के डीन तपन खाड़ा सहित उपस्थित अतिथियों ने दीप जलाकर सम्मेलन का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने साहित्यिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने और सम्मेलन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अधिवेशन का एक प्रमुख विषय झारखंड में बांग्ला शिक्षा की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़ी समस्याएं हैं। प्रतिभागी राज्य में भाषा के पठन-पाठन की परिस्थितियों पर विचार कर रहे हैं। चर्चा में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी भी रखी गई है, जिससे विभिन्न अनुभव और सुझाव सामने आ सकें।
सम्मेलन में बांग्ला साहित्य के साथ झारखंड की स्थानीय भाषाओं के संबंधों पर भी मंथन होना है। विशेष रूप से कुरमाली और संथाली के साथ साहित्यिक मेल-जोल तथा परस्पर जुड़ाव को विमर्श का विषय बनाया गया है। यह सत्र क्षेत्र की भाषाई विविधता के बीच साहित्यिक संवाद की संभावनाओं पर केंद्रित है।
प्रतिभागी साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती के संदर्भ में उनके योगदान को याद करेंगे। महाश्वेता देवी और सुकांत भट्टाचार्य की जन्मशती के अवसर पर भी उनके साहित्यिक कार्यों पर चर्चा निर्धारित है। इस तरह अधिवेशन में समकालीन भाषा-शिक्षा के प्रश्नों के साथ प्रमुख साहित्यकारों की विरासत को भी स्थान दिया गया है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय समितियों के चुनाव से संबंधित विषय पर भी विचार किया जाएगा। साहित्यिक विमर्श, स्थानीय भाषाओं से संवाद और संगठनात्मक प्रक्रिया को एक मंच पर लाने वाला यह अधिवेशन बिहार-झारखंड क्षेत्र के प्रतिनिधियों के लिए साझा चर्चा का अवसर बना है।