जमशेदपुर के करम मिलन समारोह में पाठ्यक्रम और अलग धर्म कोड समेत आठ प्रस्ताव पारित

सिदगोड़ा में आयोजित करम मिलन समारोह में आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा हुई। परिषद ने करम महोत्सव को झारखंड के पाठ्यक्रम में स्थान देने सहित आठ मांगें रखीं।

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जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित बारीडीह कमेटी हॉल में आदिवासी जन परिषद ने करम मिलन समारोह-2026 आयोजित किया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक पहचान और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर विचार रखे गए। समारोह के दौरान सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों से संबंधित आठ प्रस्ताव भी पारित किए गए।

परिषद ने करम महोत्सव को झारखंड के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की। वक्ताओं ने करम पर्व को आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा आयोजन बताया। उनके अनुसार, यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, आपसी विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प को अभिव्यक्त करता है।

कार्यक्रम में करम पर्व के कृषि और पर्यावरण से जुड़े पक्षों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है और समाज की विरासत तथा परंपराओं को जीवित रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। परिषद ने करम महोत्सव को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।

पारित प्रस्तावों में जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड लागू करने और ट्राइबल सब प्लान की राशि से विशेष पैकेज देने की मांग शामिल रही। परिषद ने राज्य में पेसा कानून को जमीनी स्तर पर लागू किए जाने का विषय भी उठाया।

इसके अतिरिक्त, आदिवासियों की धार्मिक जमीन को कथित अवैध कब्जे से बचाने तथा करम पूजा स्थलों की पहचान कर उन्हें संरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए आदिवासी धार्मिक न्यास बोर्ड गठित करने की मांग भी समारोह में पारित प्रस्तावों का हिस्सा रही।

समारोह में उपस्थित लोगों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम में परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा, महासचिव प्रकाश मंडा, सचिव विष्णु मुंडा और रांची महानगर महिला मोर्चा की अध्यक्ष शीला उरांव सहित परिषद के पदाधिकारी तथा स्थानीय लोग मौजूद रहे।