चाईबासा में हो भाषा के सरकारी उपयोग के लिए अभियान तेज करने की रणनीति

द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद भी सरकारी कार्यालयों में हो भाषा का अपेक्षित उपयोग नहीं होने पर सामाजिक संगठनों ने पत्राचार और जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

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चाईबासा में हो भाषा के सरकारी उपयोग पर बैठक में उपस्थित समिति के सदस्य

चाईबासा में सामाजिक संगठनों ने सरकारी कामकाज और कार्यालयी पत्राचार में हो भाषा का उपयोग बढ़ाने के लिए संगठित अभियान चलाने का निर्णय लिया है। बुधवार देर शाम आदिवासी हो द्वितीय राजभाषा कार्य समिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। हो भाषा को वर्ष 2011 में झारखंड की द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला था, लेकिन समिति के अनुसार सरकारी कार्यालयों में इसका अपेक्षित इस्तेमाल अब भी नहीं हो रहा है।

हिल व्यू अपार्टमेंट में हुई बैठक की अध्यक्षता पश्चिमी सिंहभूम के जिला संयोजक और हो भाषा के पूर्व वरिष्ठ शिक्षक बागुन बोदरा ने की। बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें हो समुदाय की संस्थाओं और संगठनों को सरकारी विभागों के साथ हो भाषा में पत्राचार के अभियान से जोड़ना शामिल है।

दूसरे प्रस्ताव के तहत द्वितीय राजभाषा के रूप में हो भाषा को मिले अधिकारों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर सहमति बनी। समिति का मानना है कि सरकारी विभागों को हो भाषा में पत्र भेजने की पहल बढ़ने से समुदाय के लोग अपने भाषाई अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होंगे।

बैठक में सदस्यों ने कहा कि द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिले 15 वर्ष बीतने के बावजूद कार्यालयी स्तर पर उपयोग की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनके अनुसार भाषा को केवल औपचारिक दर्जे तक सीमित रखने के बजाय सरकारी कामकाज और पत्राचार में व्यावहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विभिन्न संस्थाओं को अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

समिति ने चाईबासा और कोल्हान क्षेत्र में हो भाषा के प्रशासनिक तथा कानूनी उपयोग के पुराने संदर्भों का भी उल्लेख किया। बैठक में बताया गया कि इसका संबंध वर्ष 1837 से रहा है। झारखंड के राजस्व विभाग की विभागीय परीक्षाओं में भी राजपत्रित अधिकारियों और अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए हो भाषा से संबंधित परीक्षा की व्यवस्था रही है।

बैठक में डोबरो बुड़ीउली, पूर्वी सिंहभूम के जिला संयोजक काशराय कुदादा, सतीश सामड और बुद्धेश्वर बारी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। समिति ने कहा कि कार्यालयों में भाषा की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए अब जागरूकता और हो भाषा में नियमित पत्राचार, दोनों स्तरों पर प्रयास तेज किए जाएंगे।