रांची के बकरी बाजार में इस वर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान दक्षिण भारतीय स्थापत्य की झलक देखने को मिलेगी। भारतीय युवक संघ ने अपने दुर्गा पूजा पंडाल को तमिलनाडु के तंजावुर स्थित ऐतिहासिक बृहदेश्वर मंदिर के स्वरूप में तैयार कराने की योजना बनाई है। पंडाल के बाहर भगवान शिव के वाहन नंदी की विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
संघ के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल के अनुसार, निर्माण में प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाएगा ताकि पूरा पंडाल पर्यावरण के अनुकूल रहे। इसके निर्माण की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के कलाकारों को दी गई है। पार्वती डेकोरेटर्स के अशोक दा पंडाल तैयार कर रहे हैं, जबकि मूर्तिकार अनूप दा मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देंगे।
जिस बृहदेश्वर मंदिर को इस वर्ष की थीम बनाया गया है, वह भगवान शिव को समर्पित द्रविड़ स्थापत्य का प्रमुख उदाहरण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसका निर्माण चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने 1003 से 1010 ईस्वी के बीच कराया था। ग्रेनाइट से बने मंदिर का मुख्य शिखर करीब 66 मीटर ऊंचा है और यह यूनेस्को की ‘ग्रेट लिविंग चोला टेम्पल्स’ विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
आयोजकों ने पूरे आयोजन का अनुमानित बजट एक करोड़ रुपये रखा है। इसमें करीब 80 लाख रुपये पंडाल निर्माण और पांच लाख रुपये दुर्गा प्रतिमा पर खर्च होने का अनुमान है। शेष 15 लाख रुपये विद्युत सज्जा, पूजा तथा मेले की व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।
बकरी बाजार का यह पूजा आयोजन हर वर्ष अपनी अलग थीम और बड़े पंडाल के कारण चर्चा में रहता है। पिछले वर्ष यहां कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई थी। इस बार समिति ने भारतीय मंदिर स्थापत्य को केंद्र में रखते हुए तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर का प्रारूप चुना है।
वर्ष 1958 से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय समिति ने आयोजन के संचालन के लिए पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की हैं। राहुल अग्रवाल अध्यक्ष, रवि रोहत्गी सचिव और सत्येंद्र जालान कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। समिति के अन्य संरक्षक, उपाध्यक्ष और सह सचिव भी पूजा की तैयारियों तथा आयोजन व्यवस्था में भूमिका निभाएंगे।