गढ़वा जिले के सीमावर्ती जंगलों में छत्तीसगढ़ की ओर से आए जंगली हाथियों के कई झुंडों की मौजूदगी ने 24 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनमें करीब चार से पांच दर्जन हाथियों वाला एक बड़ा झुंड भी शामिल है। ग्रामीणों को आशंका है कि रात के समय हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचकर घरों या अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हाथियों की गतिविधियां चिनिया, रंका, रमकंडा, भंडरिया, मेराल और बड़गढ़ प्रखंड के जंगलों तथा आसपास के इलाकों में बताई गई हैं। झुंड कब और किस दिशा में बढ़ेगा, इसका अनुमान कठिन होने के कारण स्थानीय लोगों को लगातार सावधानी बरतनी पड़ रही है। प्रभावित क्षेत्रों में रात के समय घर से बाहर निकलना भी जोखिमपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, बदले हालात का असर उनकी दिनचर्या पर पड़ा है। लोग सुबह करीब सात बजे से शाम पांच बजे के बीच खेती-किसानी और दूसरे जरूरी काम पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं। शाम होने के बाद कई ग्रामीण घरों में ही रहना सुरक्षित समझते हैं। हाथियों के संभावित हमले और जान-माल के नुकसान की आशंका से लोगों की नींद भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
स्थिति पर निगरानी के लिए वन विभाग ने चार क्विक रिस्पॉन्स टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की दो टीमें भी इलाके में मौजूद हैं। विभाग ग्रामीणों को सतर्क कर रहा है और उनसे हाथियों से दूरी बनाए रखने तथा झुंड के पास जाकर उसे परेशान नहीं करने की अपील की गई है।
गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम के अनुसार, विभागीय टीमें अलर्ट हैं और ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाथियों से नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित नियमों के तहत पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है। विभाग के सामने हाथियों की निगरानी के साथ प्रभावित गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है।
उपायुक्त पीएन मिश्रा ने भी स्थिति को चिंताजनक बताते हुए वन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपने क्षेत्रों में सावधानी बनाए रखने को कहा है। फिलहाल विभागीय और विशेषज्ञ टीमें हाथियों के विचरण पर नजर रख रही हैं, जबकि छह प्रखंडों के प्रभावित गांवों में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।