छात्रवृत्ति में केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग, सीएम ने पीएम को लिखा पत्र

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए केंद्रीय सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया है।

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छात्रवृत्ति सहायता संबंधी पत्र की खबर के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की फाइल तस्वीर

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रीय सहायता बढ़ाने का आग्रह किया है। प्रभात खबर की 30 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं के वित्तपोषण तथा राज्य पर बढ़ रहे अतिरिक्त आर्थिक भार का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी और ग्रामीण बहुल राज्य में छात्रवृत्ति हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण आधार है। सरकार का पक्ष है कि आर्थिक कमजोरी के कारण किसी पात्र छात्र की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। पत्र में केंद्र से झारखंड के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का निर्धारित आवंटन बढ़ाने पर नीतिगत निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति और अल्पसंख्यक विद्यार्थियों से जुड़ी सहायता का मुद्दा भी उठाया। प्रभात खबर ने पत्र के हवाले से बताया कि समय पर पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार को अधिक वित्तीय जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। ये दावे राज्य सरकार की ओर से पत्र में रखे गए पक्ष हैं; केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी।

केंद्र की छात्रवृत्ति व्यवस्था के संदर्भ में 22 जुलाई को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो की सूचना में बताया गया था कि अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति केंद्र प्रायोजित योजनाएं हैं। उस आधिकारिक सूचना के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को कम करना और पात्र विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में सहायता देना है।

पत्र में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर केंद्रीय सहयोग की समीक्षा करने की मांग की गई है। राज्य सरकार का कहना है कि पर्याप्त और समयबद्ध वित्तपोषण से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने में देरी कम हो सकती है। आगे का निर्णय केंद्र सरकार के विचार और संबंधित मंत्रालयों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

स्रोत

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