जगन्नाथपुर में सांकेतिक भाषा पर कार्यशाला, 150 विद्यार्थियों ने सीखे संवाद के बुनियादी तरीके

पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों को भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व, उपयोग और समावेशी संवाद की जानकारी दी गई।

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पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर स्थित पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सांकेतिक भाषा पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। टाटा स्टील फाउंडेशन के ‘सबल’ अभियान के तहत हुए इस कार्यक्रम में विद्यालय के 150 विद्यार्थियों और सात शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व से परिचित कराना था। इसके साथ ही दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और विद्यालयी वातावरण में समावेशी सोच को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया गया।

कार्यक्रम में ‘सबल’ की नोवामुंडी टीम से जुड़े विलेज रिसोर्स पर्सन सोनी हेंब्रम और विजय तिरिया ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों को सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी दी और बताया कि इसका व्यावहारिक तथा दैनिक जीवन में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद करने के शुरुआती तरीके सीखे। कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और उन्होंने सीखी गई संवाद पद्धति का आगे भी अभ्यास जारी रखने का संकल्प लिया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद कुमार पांडे ने आयोजन के लिए ‘सबल’ टीम के प्रति आभार जताया। उनके अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सभी को साथ लेकर चलने वाली सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला विद्यालय परिसर में सौहार्दपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुई। आयोजन ने विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को संवाद के एक ऐसे माध्यम से परिचित कराया, जिसका उद्देश्य श्रवण या वाणी संबंधी दिव्यांगता वाले लोगों के साथ संपर्क और सहभागिता को अधिक सहज बनाना है।