जमशेदपुर में आदिवासी महिलाओं ने पेड़ों को राखी बांधकर जंगल बचाने का संकल्प लिया

रक्षाबंधन पर जमशेदपुर की आदिवासी महिलाओं ने पेड़ों को राखी बांधी। यह आयोजन झारखंड में चलाए जा रहे एक महीने के ‘पेड़ बचाओ’ अभियान का हिस्सा है।

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जमशेदपुर में रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधती आदिवासी महिलाएं

जमशेदपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर आदिवासी महिलाओं ने पेड़ों को राखी बांधकर जंगलों की रक्षा का संकल्प लिया। महिलाओं ने पेड़ों को परिवार का हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण का संदेश दिया। यह आयोजन झारखंड में प्रस्तावित ‘पेड़ बचाओ’ अभियान से जुड़ा है, जिसके माध्यम से लोगों और प्रकृति के बीच संबंध को मजबूत करने की पहल की जा रही है।

कार्यक्रम में शामिल स्थानीय महिला रेशमा मर्डी ने बताया कि जंगलों की रक्षा की सीख उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है। उनके अनुसार, जंगल माता-पिता की तरह जीवन का आधार हैं। पेड़ों को राखी बांधने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक प्रकृति संरक्षण का यही संदेश पहुंचाना है।

पद्मश्री जमुना टुडू ने भी पेड़ों को राखी बांधी। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने पेड़ों को भाई मानते हुए उनकी रक्षा करने और जंगलों को कटने से बचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने जंगल में रहने वाले जीव-जंतुओं की सुरक्षा को भी सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

अभियान से संबंधित जानकारी के अनुसार, रक्षाबंधन पर झारखंड के 700 गांवों में करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान एक महीने तक चलना है। इस अवधि में राज्य के सभी 24 जिलों के चिह्नित गांवों में लगभग तीन लाख पेड़ों तक पहुंचने की योजना बताई गई है।

अभियान की औपचारिक शुरुआत गुमला जिले के जोराड़ गांव में एक पेड़ को राखी बांधकर किए जाने की जानकारी दी गई है। मीडिया रिपोर्ट में प्रधान मुख्य वन संरक्षक के हवाले से कहा गया है कि इस पहल का दायरा ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाने और अधिक लोगों को पेड़ों के संरक्षण से जोड़ने की तैयारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत वर्ष 2004 में धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के लुकैया गांव से हुई थी। तब से राज्य के 12 हजार से अधिक गांवों को कार्यक्रम से जोड़ने का दावा किया गया है। लुकैया में 20 हजार से अधिक महुआ पेड़ों के संरक्षण और उनसे ग्रामीण आजीविका को सहायता मिलने की बात भी अभियान से जुड़े लोगों ने कही है।