जमशेदपुर के बिष्टुपुर में पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को जमीन की सबलीज से जुड़े 2 करोड़ 23 लाख 86 हजार रुपये के बकाया भुगतान के लिए पत्र भेजा गया है। कंपनी को राशि जमा करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर सबलीज की स्वीकृति रद्द करने और जमीन वापस लेने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पत्र के अनुसार, मांगी गई राशि वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15 तक की अवधि की है। इसमें निर्धारित लीज किराये के साथ 25 प्रतिशत रोड सेस भी शामिल है। संबंधित पक्ष को पहले भी पत्र भेजे गए थे और उसकी ओर से पक्ष रखा गया था, लेकिन बकाया राशि का भुगतान अब तक नहीं होने की बात कही गई है।
इस मांग के समर्थन में झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 8 जून 2007 के पत्र का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि प्रस्तावित सबलीज की स्वीकृति वार्षिक किराया और सेस के भुगतान की शर्त पर दी गई थी। सरकारी स्वीकृति में बकाया राशि की वसूली पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत किए जाने का प्रावधान भी बताया गया है।
पत्र में 7 मार्च 2008 को हुए लीज समझौते की शर्तों का भी हवाला है। इसके मुताबिक, सबलीजधारी को तय दर पर किराया और सेस का भुगतान प्रत्येक वर्ष 6 जनवरी और 6 जुलाई तक करना था। भुगतान में देरी पर ब्याज की शर्त भी थी। समझौते की एक धारा के आधार पर छह महीने तक देय राशि लंबित रहने की स्थिति में जमीन पर दोबारा कब्जा लेने और सबलीज समाप्त करने का अधिकार होने की बात कही गई है।
दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल अन्य लागू सेस को मौजूदा मांग में शामिल नहीं किया गया है। लीज किराये के 120 प्रतिशत तक के दूसरे सेस से जुड़ा विषय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बताया गया है। मौजूदा नोटिस इसलिए केवल बताई गई अवधि के लीज किराये और 25 प्रतिशत रोड सेस पर केंद्रित है।
अब पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्धारित अवधि में भुगतान करना होगा। ऐसा नहीं होने पर सबलीज रद्द करने और संबंधित जमीन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। नोटिस में संभावित कार्रवाई संबंधित कंपनी के जोखिम और खर्च पर किए जाने की बात भी दर्ज है।